सीधा जवाब: रवि किशन (असली नाम रवींद्र श्यामनारायण शुक्ला) भोजपुरी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक, हिंदी-तेलुगु फ़िल्मों के अभिनेता और 2019 से गोरखपुर के भाजपा सांसद हैं। उनका जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई में हुआ।
ख़ास बात: जिस अभिनेता ने ख़ुद के मुताबिक़ 450 भोजपुरी फ़िल्में कीं, उसी ने मार्च 2026 में कहा — “भोजपुरी सिनेमा अब लगभग मर चुका है।”
भोजपुरी सिनेमा की बात हो और रवि किशन का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। 2003 में ‘सैयां हमार’ से शुरू हुआ उनका भोजपुरी सफ़र उन्हें इस इंडस्ट्री के पहले बड़े सुपरस्टारों में ले गया। फिर हिंदी सिनेमा में सपोर्टिंग रोल, दक्षिण की फ़िल्मों में विलेन, टीवी रियलिटी शो, और आख़िर में संसद — रवि किशन का करियर भोजपुरी पट्टी के किसी भी दूसरे सितारे से ज़्यादा फैला हुआ है।
रवि किशन कौन हैं, उन्होंने कौन-सी फ़िल्में कीं, राजनीति में कैसे आए और आज भोजपुरी इंडस्ट्री के बारे में क्या सोचते हैं — पूरी कहानी यहां है।
रवि किशन — एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| असली नाम | रवींद्र श्यामनारायण शुक्ला |
| जन्म | 17 जुलाई 1969, मुंबई |
| उम्र | 57 साल (2026 में) |
| पैतृक गांव | केराकत, ज़िला जौनपुर (उत्तर प्रदेश) |
| पढ़ाई | 12वीं तक, रिज़वी कॉलेज, बांद्रा (मुंबई) |
| पहली फ़िल्म | ‘पीतांबर’ (1992, हिंदी) |
| पहली भोजपुरी फ़िल्म | ‘सैयां हमार’ (2003) |
| पत्नी | प्रीति शुक्ला (शादी: 10 दिसंबर 1993) |
| बच्चे | चार — एक बेटा, तीन बेटियां |
| राजनीतिक पद | लोकसभा सांसद, गोरखपुर (2019 से, भाजपा) |
मुंबई में जन्म, जौनपुर से जड़ें
रवि किशन मुंबई में पैदा हुए, लेकिन उनका परिवार उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले के केराकत से आता है। पांच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे हैं, और बचपन के लगभग सात साल उन्होंने जौनपुर में ही बिताए। यही वजह है कि भोजपुरी और पूर्वांचल की बोली उनके लिए सीखी हुई भाषा नहीं, घर की ज़बान रही।
पढ़ाई उन्होंने मुंबई के बांद्रा स्थित रिज़वी कॉलेज से 12वीं तक की, और फिर अभिनय की ओर मुड़ गए।
हिंदी सिनेमा से शुरुआत, भोजपुरी में स्टारडम
रवि किशन का फ़िल्मी सफ़र 1992 में हिंदी फ़िल्म ‘पीतांबर’ से शुरू हुआ। 1990 के दशक में वे ज़्यादातर छोटे सपोर्टिंग रोल करते रहे। असली पहचान 2003 में आई — जब सलमान ख़ान की ‘तेरे नाम’ में उनके किरदार ने ध्यान खींचा।
उसी साल उन्होंने भोजपुरी फ़िल्म ‘सैयां हमार’ की, जो बड़ी हिट साबित हुई। इसके बाद रवि किशन भोजपुरी सिनेमा का लगभग पर्याय बन गए। यह वह दौर था जब भोजपुरी इंडस्ट्री लंबे सूखे के बाद दोबारा खड़ी हो रही थी, और रवि किशन उस वापसी के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में थे। (भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत की कहानी के लिए पढ़ें: पहली भोजपुरी फ़िल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ का इतिहास।)
रवि किशन की प्रमुख भोजपुरी फ़िल्में
| फ़िल्म | साल |
|---|---|
| सैयां हमार | 2003 |
| राजा भोजपुरिया | 2005 |
| कब होई गवना हमार | 2005 |
| बांके बिहारी MLA | 2007 |
| धरम वीर | 2008 |
| भूमिपुत्र | 2009 |
| सत्यमेव जयते | 2010 |
| एक और फ़ौलाद | 2012 |
| लव और राजनीति | 2016 |
| सनकी दरोगा | 2018 |
इनके अलावा ‘पंडित जी बताईं ना बियाह कब होई’, ‘दूल्हा मिलल दिलदार’, ‘देवरा बड़ा सतावेला’, ‘गंगा’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘रखवाला’ और ‘बलिदान’ उनकी बड़ी भोजपुरी हिट्स में गिनी जाती हैं।
‘कब होई गवना हमार’ (2005) ख़ास है — इस फ़िल्म ने भोजपुरी की सर्वश्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था। इसका निर्माण दीपा नारायण ने किया था और निर्देशन आनंद डी. घटराज ने। रवि किशन जब कहते हैं कि “मेरी एक भोजपुरी फ़िल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला”, तो इशारा इसी फ़िल्म की ओर होता है।
750 फ़िल्में या 200? आंकड़े मेल नहीं खाते
रवि किशन ख़ुद कई मंचों पर कह चुके हैं कि उन्होंने 750 फ़िल्में की हैं, जिनमें 450 भोजपुरी हैं। मार्च 2026 में दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (IFFD) में भी उन्होंने यही संख्या दोहराई। लेकिन विकिपीडिया उनकी फ़िल्मों की संख्या 200 से ज़्यादा बताता है।
दोनों में इतना बड़ा फ़र्क़ क्यों है, इसका कोई आधिकारिक हिसाब उपलब्ध नहीं है। भोजपुरी फ़िल्मों का कोई भरोसेमंद केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं रहता — यह वही समस्या है जो भोजपुरी फ़िल्मों की कमाई के आंकड़ों में भी दिखती है (देखें: भोजपुरी की सबसे ज़्यादा कमाई वाली फ़िल्में)। इसलिए 750 को रवि किशन का अपना दावा, और 200+ को दर्ज रिकॉर्ड मानना ही ईमानदार तरीक़ा है।
हिंदी और दक्षिण की फ़िल्मों में रवि किशन
भोजपुरी स्टार होते हुए भी रवि किशन ने हिंदी सिनेमा से नाता नहीं तोड़ा। उनकी चर्चित हिंदी फ़िल्मों में ‘फिर हेरा फेरी’ (2006), ‘1971’ (2007), ‘लक’ (2009), ‘रावण’ (2010), ‘एजेंट विनोद’ (2012), ‘बुलेट राजा’ (2013), ‘मुक्काबाज़’ (2017) और ‘बाटला हाउस’ (2019) शामिल हैं।
करियर का सबसे बड़ा सम्मान उन्हें 2024 की ‘लापता लेडीज़’ से मिला। इस फ़िल्म के लिए उन्होंने फ़िल्मफ़ेयर और IIFA — दोनों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता।
तेलुगु सिनेमा में उन्होंने 2014 में ‘रेस गुर्रम’ से शुरुआत की और फिर ‘किक 2’ (2015), ‘साक्ष्यम’ (2018) और ‘सई रा नरसिम्हा रेड्डी’ (2019) जैसी फ़िल्मों में नज़र आए। 2026 में वे नेटफ़्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीज़न और फ़िल्म ‘महादेव का गोरखपुर’ के प्रचार में दिखे।
एक दिलचस्प रिकॉर्ड भी उनके नाम है: 2008 में उन्होंने ‘स्पाइडर-मैन 3’ में टोबी मैग्वायर के किरदार को भोजपुरी में आवाज़ दी — किसी हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर की पहली भोजपुरी डबिंग।
टीवी: बिग बॉस के पहले सीज़न से झलक तक
रवि किशन ‘बिग बॉस’ के पहले सीज़न (2006–07) के कंटेस्टेंट थे और तीसरे स्थान पर रहे। (सभी सीज़न के विजेताओं की लिस्ट: बिग बॉस विनर्स लिस्ट।) इसके बाद उन्होंने 2009–10 में ‘राज़ पिछले जनम का’ के दो सीज़न होस्ट किए और 2012 में ‘झलक दिखला जा’ के पांचवें सीज़न में हिस्सा लिया।
राजनीति: जौनपुर में हार, गोरखपुर में जीत
रवि किशन का राजनीतिक सफ़र आसान शुरुआत से नहीं हुआ। 2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर अपने पैतृक ज़िले जौनपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और सिर्फ़ 42,759 वोट (4.25%) पाकर छठे स्थान पर रहे।
फ़रवरी 2017 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। 2019 में पार्टी ने उन्हें गोरखपुर से उतारा — और नतीजा बिल्कुल उलटा रहा।
| चुनाव | सीट / पार्टी | नतीजा |
|---|---|---|
| 2014 | जौनपुर / कांग्रेस | हार — 42,759 वोट, छठा स्थान |
| 2019 | गोरखपुर / भाजपा | जीत — 7,17,122 वोट; सपा के रामभुआल निषाद को 3,01,664 वोटों से हराया |
| 2024 | गोरखपुर / भाजपा | जीत — सपा की काजल निषाद को 1,03,526 वोटों से हराया |
2025 में उन्हें संसदीय कामकाज के लिए संसद रत्न पुरस्कार भी मिला। भोजपुरी सितारों के राजनीति में आने का सिलसिला उन्हीं तक सीमित नहीं है — मनोज तिवारी, निरहुआ और पवन सिंह भी इसी राह पर हैं।
“भोजपुरी सिनेमा लगभग मर चुका है”
मार्च 2026 में द प्रिंट से बातचीत में रवि किशन ने अपनी ही इंडस्ट्री पर सबसे तीखी टिप्पणी की। उनके मुताबिक़ (अंग्रेज़ी से अनुवाद) भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री में “अच्छे लेखकों और जुनून की कमी है”, और “अब कोई थिएटर नहीं जाता, सब फ़ोन पर देखते हैं।” उन्होंने यहां तक कहा कि भोजपुरी सिनेमा “अब लगभग मर चुका है”, और इसे उसी तरह की ताज़गी चाहिए जैसी ‘धुरंधर’ ने हिंदी सिनेमा को दी।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि यह किसी आलोचक का नहीं, उस अभिनेता का है जिसकी पहचान ही भोजपुरी सिनेमा से बनी। उन्होंने इंडस्ट्री की जड़ें 1962 तक बताईं और कहा कि यह एक लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देती है — यानी चिंता सिर्फ़ फ़िल्मों की नहीं, उस पूरे कारोबार की है।
परिवार और विवाद
रवि किशन की शादी 10 दिसंबर 1993 को प्रीति शुक्ला से हुई। उनके चार बच्चे हैं। बेटी रीवा किशन ने 2020 में फ़िल्म ‘सब कुशल मंगल’ से अभिनय में क़दम रखा।
2024 में अपर्णा ठाकुर नाम की एक महिला ने दावा किया कि वह रवि किशन की दूसरी पत्नी हैं और उनकी बेटी के पिता रवि किशन हैं। जवाब में रवि किशन की क़ानूनी टीम और पत्नी प्रीति ने उगाही और मानहानि का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई। मई 2026 में रवि किशन ने अपनी छवि के ख़िलाफ़ कथित रूप से संगठित मानहानि अभियान को लेकर भी FIR दर्ज कराई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रवि किशन का असली नाम क्या है?
रवींद्र श्यामनारायण शुक्ला।
रवि किशन की उम्र कितनी है?
उनका जन्म 17 जुलाई 1969 को हुआ, यानी 2026 में वे 57 साल के हैं।
रवि किशन किस सीट से सांसद हैं?
उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट से, भाजपा के टिकट पर — 2019 से और 2024 में दोबारा चुने गए।
रवि किशन की पहली भोजपुरी फ़िल्म कौन-सी है?
‘सैयां हमार’ (2003), जो बड़ी हिट रही।
रवि किशन ने कितनी फ़िल्में की हैं?
उनके अपने दावे के मुताबिक़ 750, जिनमें 450 भोजपुरी। विकिपीडिया यह संख्या 200 से ज़्यादा बताता है।
रवि किशन को कौन-से बड़े अवॉर्ड मिले हैं?
‘लापता लेडीज़’ के लिए फ़िल्मफ़ेयर और IIFA सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, और 2025 में संसद रत्न पुरस्कार। उनकी भोजपुरी फ़िल्म ‘कब होई गवना हमार’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।
भोजपुरी सितारों की और कहानियों के लिए देखें भोजपुरी सेक्शन।
स्रोत: Wikipedia, ThePrint, NewKerala (IFFD 2026), Wikipedia — Kab Hoi Gawna Hamar।












