भोजपुरी की सबसे बड़ी हिट कौन? विकिपीडिया ₹35 करोड़ कहता है, मनोज तिवारी ₹54 करोड़ — और किसी ट्रैकर के पास जवाब नहीं

By Riya Mehta

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भोजपुरी की सबसे बड़ी हिट कौन? विकिपीडिया ₹35 करोड़ कहता है, मनोज तिवारी ₹54 करोड़ — और किसी ट्रैकर के पास जवाब नहीं
सीधा जवाब: जो लिस्टें छपी हुई मिलती हैं, उनमें सबसे ऊपर ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ (2003) और ‘प्रतिज्ञा’ (2008) हैं — दोनों ₹35 करोड़ पर बराबर। लेकिन असली बात यह है कि भोजपुरी फ़िल्मों का बॉक्स ऑफ़िस कोई ट्रैकर व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं करता, इसलिए ये आँकड़े पुष्ट रिकॉर्ड नहीं, दावे हैं — और एक ही फ़िल्म के लिए ₹4.5 करोड़ से ₹54 करोड़ तक के दावे मौजूद हैं।

“भोजपुरी की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म कौन है” — यह सवाल जितना सीधा लगता है, उसका जवाब उतना ही उलझा हुआ है। हिंदी, तमिल या तेलुगू फ़िल्मों के लिए Sacnilk और Bollywood Hungama जैसे ट्रैकर रोज़ के आँकड़े छापते हैं। भोजपुरी के लिए ऐसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है। इस पेज पर दोनों चीज़ें अलग-अलग रखी गई हैं: जो आँकड़े छपे हैं, और उन आँकड़ों पर कितना भरोसा किया जा सकता है।

छपी हुई लिस्ट: भोजपुरी की टॉप 5 कमाई वाली फ़िल्में

विकिपीडिया के भोजपुरी फ़िल्मों वाले पेज पर एक तालिका है, जिसका एकमात्र स्रोत नवभारत टाइम्स की एक लिस्ट है (आर्काइव की तारीख़ अगस्त 2022)। उसके मुताबिक़:

#फ़िल्मसालकमाई (दावा)
1ससुरा बड़ा पइसावाला2003₹35 करोड़
2प्रतिज्ञा2008₹35 करोड़
3गंगा2006₹21 करोड़
4बॉर्डर2018₹19 करोड़
5निरहुआ रिक्शावाला2008₹7.5 करोड़

इस तालिका से तीन बातें साफ़ निकलती हैं। पहली, टॉप 5 में तीन फ़िल्में 2003 से 2008 के बीच की हैं — यानी भोजपुरी सिनेमा के दूसरे उभार का दौर। दूसरी, 2018 की ‘बॉर्डर’ के बाद की कोई फ़िल्म इस लिस्ट में नहीं है। तीसरी, पहले और पाँचवें नंबर के बीच का फ़र्क़ लगभग पाँच गुना है — इतने छोटे आधार पर बनी लिस्ट में यह अंतर बहुत ज़्यादा है।

दिक़्क़त क्या है: एक ही फ़िल्म के लिए चार अलग आँकड़े

‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ को ही ले लें। हमने इस फ़िल्म के बजट और कमाई पर अलग से काम किया था, और नतीजा यह निकला कि एक ही फ़िल्म के लिए ₹4.5 करोड़ से ₹54 करोड़ तक के आँकड़े मौजूद हैं — ₹54 करोड़ का दावा ख़ुद मनोज तिवारी का है, जबकि विकिपीडिया के दूसरे पन्ने पर ₹9 करोड़ दर्ज है। पूरा हिसाब इस रिपोर्ट में चार स्रोतों के साथ रखा गया है

यह लापरवाही नहीं, ढाँचे की कमी है। भोजपुरी फ़िल्में बड़े हिस्से में सिंगल स्क्रीन और ग्रामीण बेल्ट में चलती हैं, जहाँ रोज़ की रिपोर्टिंग का कोई सिस्टम नहीं। वितरक अपने आँकड़े नहीं छापते, और मीडिया आमतौर पर निर्माता के दिए नंबर पर भरोसा कर लेता है। नतीजा — “सबसे बड़ी हिट” का कोई एक भरोसेमंद जवाब आज उपलब्ध नहीं है, और जो कोई एक नंबर पर अड़े, उससे स्रोत पूछ लेना चाहिए।

तो इंडस्ट्री कितनी बड़ी है?

फ़िल्म-दर-फ़िल्म आँकड़े भरोसेमंद नहीं हैं, लेकिन इंडस्ट्री के पैमाने के कुछ आँकड़े दर्ज हैं:

  • ₹2,000 करोड़ — भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री का आकार, इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के हवाले से। यह आँकड़ा 2017 का है, यानी अब नौ साल पुराना — इसे आज की स्थिति न समझें।
  • 186 फ़िल्में — 2022 में बनी थिएट्रिकल भोजपुरी फ़िल्मों की संख्या।
  • 100+ फ़िल्में प्रति साल — 2001 के बाद का औसत।
  • करीब 150 फ़िल्में पूरे 24 साल में — 1977 से 2001 के बीच, यानी साल में औसतन 6। इसी से समझ आता है कि 2001 के बाद का उछाल कितना बड़ा था।
  • 19 फ़िल्में — 1962 से 1967 के बीच, इंडस्ट्री के पहले दौर में।

यानी जो फ़र्क़ है वह उत्पादन में है, कमाई के रिकॉर्ड में नहीं। साल में 186 फ़िल्में बनाने वाली इंडस्ट्री के पास पाँच फ़िल्मों की एक असत्यापित टॉप लिस्ट है — यही इस सवाल का सबसे ईमानदार जवाब है।

इतिहास के तीन मोड़

1963 — ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ इबो’

पहली भोजपुरी फ़िल्म, जिसके बनने की कहानी ख़ुद दिलचस्प है — यह तत्कालीन राष्ट्रपति के सुझाव पर बनी थी, इसमें करीब ₹5 लाख लगे और इसने ₹75 लाख कमाए। यह पूरा किस्सा यहाँ दर्ज है। ध्यान दें कि 15 गुना रिटर्न का यह आँकड़ा आज की किसी भी फ़िल्म के दावे से ज़्यादा भरोसेमंद ढंग से दर्ज है।

1977 — ‘दंगल’

भोजपुरी की पहली रंगीन फ़िल्म। इसके बाद के दो दशक इंडस्ट्री के लिए सबसे सुस्त रहे — साल में औसतन छह फ़िल्में।

2001 — ‘सइयाँ हमार’

इस फ़िल्म से इंडस्ट्री का दूसरा जन्म माना जाता है। इसके दो साल बाद ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ आई, मनोज तिवारी स्टार बने, और उत्पादन सौ फ़िल्मों प्रति साल के पार चला गया। मनोज तिवारी का गायक से सुपरस्टार और फिर सांसद बनने तक का सफ़र इस प्रोफ़ाइल में है।

अब कमाई कहाँ से आती है

आज भोजपुरी फ़िल्म की पहुँच थिएटर से ज़्यादा स्क्रीन के बाहर है। नई फ़िल्में ZEE5, Chaupal और YouTube जैसे प्लैटफ़ॉर्म पर आती हैं, और कई तो सीधे YouTube पर मुफ़्त रिलीज़ होती हैं — किस फ़िल्म को कहाँ देखा जा सकता है, इसकी पूरी गाइड यहाँ है

इसका एक सीधा नतीजा है: जिस फ़िल्म की कमाई टिकट खिड़की पर नहीं, स्ट्रीमिंग और म्यूज़िक राइट्स पर टिकी हो, उसका “बॉक्स ऑफ़िस” नंबर अपने-आप अधूरा हो जाता है। इसलिए अगली बार कोई लिस्ट ₹100 करोड़ का दावा करे, तो सवाल यह पूछें कि वह नंबर थिएटर का है, सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स का, या तीनों जोड़कर बनाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भोजपुरी की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म कौन है?

छपी हुई लिस्टों में ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ (2003) और ‘प्रतिज्ञा’ (2008) दोनों ₹35 करोड़ पर पहले नंबर पर हैं। इनमें से किसी एक को निर्विवाद नंबर 1 कहना ठीक नहीं होगा, क्योंकि आँकड़ों का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है।

क्या ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ ने सच में ₹35 करोड़ कमाए थे?

इस पर सहमति नहीं है। मनोज तिवारी ₹54 करोड़ बताते हैं, विकिपीडिया के एक पन्ने पर ₹9 करोड़ दर्ज है, और कुछ रिपोर्टों में ₹4.5 करोड़ का आँकड़ा है। फ़िल्म का बजट करीब ₹30 लाख था, इस पर ज़्यादा सहमति है।

भोजपुरी फ़िल्मों का बॉक्स ऑफ़िस कौन ट्रैक करता है?

व्यवस्थित रूप से कोई नहीं। हिंदी और दक्षिण की फ़िल्मों के लिए जो रोज़ाना ट्रैकिंग होती है, भोजपुरी के लिए उसका कोई समकक्ष उपलब्ध नहीं है।

भोजपुरी इंडस्ट्री साल में कितनी फ़िल्में बनाती है?

2022 में 186 थिएट्रिकल फ़िल्में बनीं। 2001 के बाद से औसत सौ से ऊपर रहा है।

पहली भोजपुरी फ़िल्म कौन थी?

‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ इबो’, 1963 में रिलीज़ हुई। पहली रंगीन भोजपुरी फ़िल्म ‘दंगल’ (1977) थी।

2018 के बाद की कोई फ़िल्म टॉप लिस्ट में क्यों नहीं है?

क्योंकि लिस्ट का स्रोत 2022 तक का है और उसके बाद भोजपुरी फ़िल्मों की कमाई का कोई नया संकलित रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं हुआ। इसे “2018 के बाद कोई हिट नहीं” न पढ़ें — यह आँकड़ों की अनुपस्थिति है, नतीजा नहीं।

स्रोत: विकिपीडिया के List of Bhojpuri films और Bhojpuri cinema पेज (जिनके मूल स्रोत नवभारत टाइम्स और इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्टें हैं)। भोजपुरी की और ख़बरें भोजपुरी सेक्शन में।

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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