भोजपुरी फ़िल्म को ₹4 करोड़ तक अनुदान की नीति 2024 से — फिर CM सम्राट क्यों बोले ‘सब्सिडी इस साल से’?

By Riya Mehta

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भोजपुरी फ़िल्म को ₹4 करोड़ तक अनुदान, नीति 2024 से फिर CM के ऐलान पर सवाल
सीधा जवाब: बिहार की फ़िल्म प्रोत्साहन नीति 2024 में फ़िल्म बनाने पर ₹2 से ₹4 करोड़ तक अनुदान का प्रावधान है, शर्त यह कि 75% शूटिंग बिहार में हो। भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और बज्जिका फ़िल्मों के लिए लागत के 50% तक अनुदान बताया गया है। नीति जुलाई 2024 से लागू है, फिर भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अक्टूबर 2026 को कहा कि सब्सिडी देने की शुरुआत “इस वर्ष से” भोजपुरी फ़िल्मों से होगी।

पटना के बापू सभागार में सोमवार, 26 अक्टूबर को IVY भोजपुरी म्यूज़िक अवॉर्ड्स के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुरी इंडस्ट्री को एक घोषणा दी। दैनिक जागरण के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि इस वर्ष से फ़िल्मों को सब्सिडी देने की शुरुआत भोजपुरी फ़िल्मों से होगी। समारोह की पूरी विजेता सूची हम यहाँ दे चुके हैं।

घोषणा अच्छी ख़बर है, लेकिन इसमें एक सवाल छिपा है। बिहार में फ़िल्मों को अनुदान देने वाली नीति कोई नई नहीं है — वह जुलाई 2024 से काग़ज़ पर मौजूद है, और उसमें रक़म भी तय है। तो फिर “शुरुआत इस साल से” का मतलब क्या है? यह पेज यही समझाता है: नीति में असल में क्या लिखा है, किसे कितना मिल सकता है, आवेदन कहाँ होता है — और कौन-सी बात अभी तक साफ़ नहीं है।

बिहार फ़िल्म प्रोत्साहन नीति 2024 क्या है?

नीतीश कुमार की अध्यक्षता में जुलाई 2024 में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में राज्य की पहली फ़िल्म प्रोत्साहन नीति को मंज़ूरी मिली थी। प्रभात ख़बर के मुताबिक़ तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और कला-संस्कृति मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसका मक़सद बिहार की सांस्कृतिक विरासत को फ़िल्मों के ज़रिए आगे लाना, क्षेत्रीय भाषाओं में अच्छी फ़िल्मों को बढ़ावा देना, शूटिंग की अनुमति आसान करना और निजी निवेश खींचना बताया था।

ऑल इंडिया रेडियो (न्यूज़ ऑन एयर) की रिपोर्ट के मुताबिक़ नीति फ़ीचर फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री, टीवी सीरियल और OTT फ़िल्म — चारों पर लागू है, और भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका व बज्जिका फ़िल्मों के लिए विशेष अनुदान और प्रोत्साहन रखे गए हैं।

भोजपुरी फ़िल्म को कितनी सब्सिडी मिल सकती है?

अलग-अलग समय की आधिकारिक बयानबाज़ी और अख़बारी रिपोर्टों को जोड़ें, तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है:

प्रावधानक्या कहा गया हैस्रोत
अधिकतम अनुदान₹2 करोड़ से ₹4 करोड़ तकप्रभात ख़बर (जुलाई 2024), जागरण (जून 2026)
मुख्य शर्तफ़िल्म की कम से कम 75% शूटिंग बिहार मेंप्रभात ख़बर (2024)
क्षेत्रीय भाषा की फ़िल्मेंभोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका, बज्जिका — 50% तक अनुदानप्रभात ख़बर (सितंबर 2026)
हिंदी और अंग्रेज़ी फ़िल्में25% तक सहायताप्रभात ख़बर (सितंबर 2026)
बिहार के कलाकारों को काम देनाउन्हें दी गई रक़म का 50% अतिरिक्त अनुदानकला मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, जागरण (जून 2026)
किन चीज़ों परफ़ीचर फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री, टीवी सीरियल, OTTन्यूज़ ऑन एयर (2024)
दूसरी सुविधाएँसिंगल विंडो अनुमति, फ़िल्म फ़ैसिलिटेशन सेल, कलाकारों की सुरक्षा व्यवस्थाप्रभात ख़बर (2024)

2024 में सरकार ने इसे देश का सबसे ज़्यादा अनुदान बताया था। इंडियन मास्टरमाइंड्स की अक्टूबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक़ कई राज्यों में यह सीमा ₹2.5 करोड़ है। उसी रिपोर्ट में नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा और सत्यजीत रे फ़िल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले बिहार के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का ज़िक्र भी है।

भोजपुरी निर्माताओं के लिए सबसे काम की लाइन वह है जो जून 2026 में कला मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कही: बिहार के कलाकारों को काम देने पर उन्हें दी गई राशि का 50% अतिरिक्त अनुदान। मंत्री के मुताबिक़ इसका मक़सद यही है कि बिहार के कलाकारों को काम के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े — यानी अनुदान सिर्फ़ लोकेशन पर नहीं, स्थानीय कास्टिंग पर भी टिका है।

तो CM ने “शुरुआत इस साल से” क्यों कहा?

यहीं वह बात है जो अब तक किसी आधिकारिक दस्तावेज़ में साफ़ नहीं है। मार्च 2025 में नवभारत टाइम्स ने बताया था कि भोजपुरी फ़िल्म ‘संघतिया’ इस नीति के तहत सब्सिडी पाने वाली पहली फ़िल्म हो सकती है। उसके बाद से शूटिंग की अनुमतियों के आँकड़े बार-बार आए, लेकिन किसी फ़िल्म को अनुदान की रक़म सचमुच मिल जाने की कोई सार्वजनिक रिपोर्ट हमें नहीं मिली।

मुख्यमंत्री का “इस वर्ष से शुरुआत” वाला वाक्य इसी ओर इशारा करता है कि अनुदान का भुगतान अब शुरू होना है। लेकिन कितनी फ़िल्मों को, कब तक और किस क्रम में — यह न मंच से बताया गया, न किसी अधिसूचना में आया है। जब तक कला एवं संस्कृति विभाग इसकी सूची या आदेश जारी नहीं करता, इसे एक राजनीतिक घोषणा ही मानिए, ज़मीन पर उतरी योजना नहीं।

शूटिंग की अनुमति के आँकड़े — हर बार अलग

नीति के असर को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग संख्याएँ आई हैं। यह भोजपुरी के बॉक्स ऑफ़िस आँकड़ों जैसी ही समस्या है — हर संख्या अपने समय के बयान पर टिकी है:

कबआँकड़ाकिसने बताया
मई 202514 फ़िल्मों को शूटिंग की अनुमतिजागरण, ETV भारत (शीर्षक)
दिसंबर 202537 परियोजनाओं को अनुमतिकला-संस्कृति सचिव प्रणव कुमार, पटना प्रेस
अप्रैल 202645 परियोजनाएँनवभारत टाइम्स (शीर्षक)
जून 202650 से ज़्यादा फ़िल्मेंकला मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, जागरण
सितंबर 20262024 से 45+ फ़िल्में, वेब सीरीज़ और म्यूज़िक प्रोजेक्ट; क़रीब ₹200 करोड़ ख़र्च का दावा; दिसंबर से 15+ नई फ़िल्मों की शूटिंग, ₹100 करोड़ निवेश की उम्मीदप्रभात ख़बर

ध्यान दें: ये सब शूटिंग की अनुमति के आँकड़े हैं, अनुदान के नहीं। अनुमति मिलना और सब्सिडी मिलना दो अलग चीज़ें हैं।

सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?

जागरण की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ निर्माताओं को अब अलग-अलग विभागों में आवेदन नहीं देना पड़ता। रजिस्ट्रेशन बिहार राज्य फ़िल्म विकास एवं वित्त निगम की वेबसाइट film.bihar.gov.in पर होता है। विभाग कलाकारों और वेंडरों का एक डेटाबेस भी तैयार कर रहा है, ताकि बाहर से आने वाली यूनिट स्थानीय लोगों को आसानी से काम दे सके।

पात्रता की सबसे बड़ी शर्त 75% शूटिंग बिहार में करना है। अनुदान की अंतिम राशि, ज़रूरी दस्तावेज़ और भुगतान की समय-सीमा नीति के आधिकारिक पाठ और निगम के नियमों पर निर्भर है — आवेदन से पहले वहीं से पुष्टि करें।

फ़िल्म सिटी का क्या हुआ?

सब्सिडी के साथ मुख्यमंत्री ने फ़िल्म सिटी का ज़िक्र भी दोहराया और कहा कि कलाकार मिलकर उपयुक्त जगह तय करें, सरकार निर्माण में सहयोग करेगी। यही बात वे अगस्त 2026 में ‘भोजपुरी बवाल’ के मंच से और सितंबर में पवन सिंह के एक कार्यक्रम में भी कह चुके हैं। दिसंबर 2025 में कला-संस्कृति सचिव प्रणव कुमार ने कहा था कि फ़िल्म सिटी का ढाँचा फ़िल्मकारों की तकनीकी ज़रूरतों के अध्ययन के बाद ही तय होगा। अब तक जगह, बजट या समय-सीमा की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

सरकार और भोजपुरी सिनेमा का रिश्ता पुराना है — पहली भोजपुरी फ़िल्म ही राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कहने पर बनी थी; वह कहानी हमारी ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ वाली रिपोर्ट में है। और आज भोजपुरी फ़िल्में कहाँ देखी जा सकती हैं, यह हमारी भोजपुरी फ़िल्में कहाँ देखें गाइड में है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बिहार में भोजपुरी फ़िल्म बनाने पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

बिहार फ़िल्म प्रोत्साहन नीति 2024 में ₹2 से ₹4 करोड़ तक अनुदान का प्रावधान है। क्षेत्रीय भाषा की फ़िल्मों के लिए 50% तक अनुदान बताया गया है, बशर्ते 75% शूटिंग बिहार में हो।

बिहार फ़िल्म नीति कब लागू हुई?

जुलाई 2024 में, जब नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने क्या घोषणा की?

26 अक्टूबर 2026 को पटना में उन्होंने कहा कि इस वर्ष से फ़िल्मों को सब्सिडी देने की शुरुआत भोजपुरी फ़िल्मों से होगी, और फ़िल्म सिटी के निर्माण में सरकार सहयोग करेगी।

क्या किसी भोजपुरी फ़िल्म को अब तक सब्सिडी मिली है?

हमें किसी फ़िल्म को भुगतान होने की सार्वजनिक रिपोर्ट नहीं मिली। मार्च 2025 में ‘संघतिया’ को पहली संभावित फ़िल्म बताया गया था। मुख्यमंत्री की घोषणा से लगता है कि भुगतान इसी साल शुरू होगा।

बिहार के कलाकारों को काम देने पर क्या फ़ायदा है?

जून 2026 में कला मंत्री के मुताबिक़ बिहार के कलाकारों को दी गई रक़म का 50% अतिरिक्त अनुदान निर्माता को मिलता है।

आवेदन कहाँ करें?

बिहार राज्य फ़िल्म विकास एवं वित्त निगम की वेबसाइट film.bihar.gov.in पर रजिस्ट्रेशन होता है।

स्रोत: दैनिक जागरण (26 अक्टूबर 2026, मुख्यमंत्री की घोषणा), दैनिक जागरण (जून 2026, कला मंत्री का बयान, रजिस्ट्रेशन), प्रभात ख़बर (2024, नीति के प्रावधान) और प्रभात ख़बर (सितंबर 2026, 50%/25% अनुदान, निवेश), न्यूज़ ऑन एयर (2024), इंडियन मास्टरमाइंड्स (अक्टूबर 2024), पटना प्रेस (दिसंबर 2025)। और भोजपुरी ख़बरों के लिए देखें भोजपुरी सेक्शन।

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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