अमिताभ ने 3 भोजपुरी फ़िल्में कीं और फ़ीस नहीं ली — मिथुन, अजय देवगन, धर्मेंद्र समेत 8 बॉलीवुड सितारे जो भोजपुरी परदे पर आए

By Riya Mehta

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अमिताभ ने 3 भोजपुरी फ़िल्में कीं और फ़ीस नहीं ली — मिथुन, अजय देवगन, धर्मेंद्र समेत 8 बॉलीवुड सितारे जो भोजपुरी परदे पर आए
सीधा जवाब: भोजपुरी फ़िल्मों में आए सबसे बड़े बॉलीवुड सितारे हैं अमिताभ बच्चन (‘गंगा’, ‘गंगोत्री’, ‘गंगा देवी’), हेमा मालिनी, जया बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती (‘भोले शंकर’), अजय देवगन (‘धरती कहे पुकार के’), जैकी श्रॉफ, धर्मेंद्र (‘देस परदेस’) और गुलशन ग्रोवर। इनमें से ज़्यादातर फ़िल्में 2006 से 2013 के बीच आईं।

बॉलीवुड सितारों की भोजपुरी फ़िल्में एक ऐसा अध्याय हैं जिसे आज की पीढ़ी कम जानती है। 2006 में जब अमिताभ बच्चन ठाकुर बनकर भोजपुरी परदे पर आए, तो यह सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं थी — यह उस इंडस्ट्री के लिए मान्यता थी जिसे तब तक मुंबई की फ़िल्मी दुनिया हल्के में लेती थी। सबसे दिलचस्प बात यह कि अमिताभ ने अपनी भोजपुरी फ़िल्मों के लिए फ़ीस ही नहीं ली।

नीचे पूरी सूची है — कौन-सा बॉलीवुड सितारा किस भोजपुरी फ़िल्म में आया, किसके साथ आया, और उस फ़िल्म की कहानी क्या थी।

बॉलीवुड सितारों की भोजपुरी फ़िल्में: पूरी सूची

बॉलीवुड सिताराभोजपुरी फ़िल्म (साल)भोजपुरी साथी कलाकार
अमिताभ बच्चनगंगा (2006), गंगोत्री (2007), गंगा देवी (2012)रवि किशन, मनोज तिवारी, निरहुआ
हेमा मालिनीगंगा (2006), गंगोत्री (2007)रवि किशन, मनोज तिवारी
जया बच्चनगंगा देवी (2012)निरहुआ, पाखी हेगड़े
अजय देवगनधरती कहे पुकार के (2006)मनोज तिवारी
मिथुन चक्रवर्तीभोले शंकर (2008)मनोज तिवारी, मोनालिसा
जैकी श्रॉफहम हईं खलनायक (2004), बलिदान (2009)रवि किशन (बलिदान)
धर्मेंद्रदेस परदेस (2013)पवन सिंह
गुलशन ग्रोवरगंगा देवी (2012)निरहुआ

1. अमिताभ बच्चन: तीन फ़िल्में, फ़ीस एक भी नहीं

अमिताभ बच्चन की भोजपुरी फ़िल्मों की कहानी उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत से जुड़ी है। सावंत ने बतौर प्रोड्यूसर तीनों फ़िल्में बनाईं और तीनों में अमिताभ रहे।

गंगा (2006)

अभिषेक चड्ढा के निर्देशन में बनी ‘गंगा’ में अमिताभ ने ठाकुर विजय सिंह का किरदार निभाया। कहानी गंगा (नगमा) नाम की एक पढ़ी-लिखी लड़की की है, जिसकी मदद करते हुए शंकर (रवि किशन) घायल हो जाता है। ठाकुर अपने बेटे रंजीत की शादी गंगा से तय करवाता है, और यहीं से टकराव शुरू होता है। हेमा मालिनी सावित्री बनीं और मनोज तिवारी बजरंगी। विकिपीडिया के अनुसार यह फ़िल्म भोजपुरी इंडस्ट्री के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई, क्योंकि बॉलीवुड कलाकारों की कास्टिंग ने इसे मुख्यधारा का ध्यान दिलाया। 2007 के दूसरे भोजपुरी फ़िल्म अवॉर्ड्स में इसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और नगमा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। अमिताभ और हेमा इससे पहले ‘बाग़बान’ (2003) में साथ दिख चुके थे।

गंगोत्री (2007)

‘गंगा’ का सीक्वल, जिसमें अमिताभ और हेमा मालिनी लौटे, और मनोज तिवारी के साथ भूमिका चावला जोड़ी में आईं। विकिपीडिया के मुताबिक़ मिथुन चक्रवर्ती को पहले भूमिका के भाई के रोल के लिए लिया गया था, जो ‘अग्निपथ’ (1990) के बाद अमिताभ-मिथुन को फिर साथ लाता — पर ऐसा हुआ नहीं। दिलचस्प यह भी कि भोजपुरी में बनी होने के बावजूद निर्देशक ने इसे हिंदी डब संस्करण में रिलीज़ करना चुना। इसके म्यूज़िक लॉन्च पर अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन भी पहुँचे थे।

गंगा देवी (2012)

तीसरी फ़िल्म में अमिताभ के साथ जया बच्चन भी आईं। दोनों ने दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के किरदार के माता-पिता की भूमिका निभाई। फ़िल्म चुनी हुई संस्थाओं में महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर थी। गल्फ़ न्यूज़ के मुताबिक़ अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा था कि सावंत 35 साल से उनके साथ हैं और एक दिन भी नहीं छोड़ा। उन्होंने यह भी लिखा कि ऐसे लोग और भोजपुरी फ़िल्में, जिनकी रिलीज़ सिर्फ़ बिहार तक सीमित होती है, हर तरह के प्रोत्साहन की हक़दार हैं — वह सावंत के लिए काम करते हैं और कभी फ़ीस नहीं लेते, क्योंकि यह पैसे का मामला नहीं है। इसी फ़िल्म से गुलशन ग्रोवर ने भोजपुरी में डेब्यू किया।

2. मिथुन चक्रवर्ती: ‘भोले शंकर’ (2008)

पंकज शुक्ला के निर्देशन में बनी ‘भोले शंकर’ मिथुन और मोनालिसा, दोनों की पहली भोजपुरी फ़िल्म थी। कहानी दो बेरोज़गार भाइयों — शंकर (मिथुन) और भोले (मनोज तिवारी) — की है, जिनमें से शंकर अपराध की दुनिया का डॉन बन जाता है। विकिपीडिया के मुताबिक़ यह उस वक़्त की सबसे बड़ी और सबसे महंगी भोजपुरी फ़िल्म थी और इसने भोजपुरी में सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड तोड़ा। शुरुआत में बिहार में इस पर रोक भी लगी थी। फ़िल्म के गाने ‘जय हो छठ मइया’ के लिए गायक शैलेंद्र सिंह रिटायरमेंट से लौटे थे।

3. अजय देवगन: ‘धरती कहे पुकार के’ (2006)

10 फ़रवरी 2006 को रिलीज़ हुई इस फ़िल्म में अजय देवगन ने एसपी कुणाल सिंह का स्पेशल अपीयरेंस किया। हीरो मनोज तिवारी थे — अर्जुन नाम का कॉलेज छात्र जो आईपीएस बनना चाहता है, लेकिन दोस्त की ग़लती का इल्ज़ाम अपने सिर ले लेता है। कुणाल उसकी ज़मानत कराता है और दोनों मिलकर गाँव के दबंग वीर मोंगिया से लोहा लेते हैं। विकिपीडिया इसे सुपरहिट बताता है।

4. धर्मेंद्र: ‘देस परदेस’ (2013)

द प्रिंट के मुताबिक़ विमल कुमार की ‘देस परदेस’ में धर्मेंद्र और रति अग्निहोत्री ने बुज़ुर्ग माता-पिता का किरदार निभाया, जिन्हें विदेश में बसा बेटा छोड़ देता है। फ़िल्म में पवन सिंह थे, और क़ादर ख़ान एक दरगाह पर क़व्वाली गाते नज़र आए। धर्मेंद्र के निधन के बाद पवन सिंह ने याद किया था कि करियर के संघर्ष के दिनों में उन्हें धर्मेंद्र के साथ एक भोजपुरी फ़िल्म में काम करने का मौक़ा मिला था।

5. जैकी श्रॉफ: दो भोजपुरी फ़िल्में

विकिपीडिया पर दर्ज जैकी श्रॉफ की फ़िल्मोग्राफ़ी में दो भोजपुरी फ़िल्में हैं — ‘हम हईं खलनायक’ (2004), जिसमें वह अर्जुन बने, और ‘बलिदान’ (2009), जिसमें उनका किरदार ‘ख़ान भाई’ का था। द प्रिंट के मुताबिक़ ‘बलिदान’ में उनके साथ रवि किशन थे और फ़िल्म बदले, देशभक्ति और अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ाई की कहानी थी।

2006 से 2013 ही क्यों? उस दौर का संदर्भ

यह कोई संयोग नहीं कि ज़्यादातर बड़े नाम इसी सात साल की खिड़की में आए। विकिपीडिया के अनुसार 1990 तक भोजपुरी इंडस्ट्री लगभग ख़त्म मानी जाने लगी थी। 2001 में रवि किशन की ‘सैयां हमार’ से वापसी शुरू हुई, और 2005 की ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ व ‘पंडितजी बताईं ना बियाह कब होई’ ने बिहार-झारखंड में उस समय की बॉलीवुड हिट फ़िल्मों से बेहतर कारोबार किया। बहुत कम बजट में बनी इन फ़िल्मों ने लागत का दस गुना से ज़्यादा कमाया। (भोजपुरी की सबसे बड़ी कमाई वाली फ़िल्मों पर हमारी पूरी रिपोर्ट यहाँ है।)

पैसा आया तो बड़े नाम भी आए। मनोज तिवारी इस दौर के सबसे भरोसेमंद चेहरे बने — ऊपर की सूची में अजय देवगन, मिथुन और अमिताभ, तीनों की फ़िल्मों में वह मौजूद हैं। फिर भी अमिताभ के शब्द उस दौर की सीमा भी बताते हैं: 2012 में भी भोजपुरी फ़िल्मों की रिलीज़ “सिर्फ़ बिहार तक सीमित” थी।

अब का दौर: फ़िल्म नहीं, गाने

पिछले कुछ सालों में रिश्ता उल्टी दिशा में चला है — बॉलीवुड सितारे भोजपुरी फ़िल्मों में कम, और बॉलीवुड फ़िल्मों में भोजपुरी गाने ज़्यादा। द प्रिंट के मुताबिक़ मई 2026 में ‘वेलकम टू द जंगल’ का गाना ‘घिस घिस घिस’ आया, जिसमें अक्षय कुमार भोजपुरी अंदाज़ में अक्षरा सिंह के साथ नाचते दिखे। इससे पहले ‘स्त्री 2’ का ‘आई नई’ और ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ का ‘जिया तू बिहार के लाला’ भी इसी कड़ी में आते हैं। लेकिन यह गाने हैं, भोजपुरी फ़िल्में नहीं — इसलिए वे इस सूची में शामिल नहीं हैं।

भोजपुरी सिनेमा की बाक़ी कहानियों के लिए हमारा भोजपुरी सेक्शन देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अमिताभ बच्चन ने कितनी भोजपुरी फ़िल्में कीं?

तीन — ‘गंगा’ (2006), ‘गंगोत्री’ (2007) और ‘गंगा देवी’ (2012)। तीनों उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने प्रोड्यूस कीं।

क्या अमिताभ बच्चन ने भोजपुरी फ़िल्मों के लिए फ़ीस ली थी?

नहीं। 2012 में अपने ब्लॉग पर उन्होंने लिखा था कि वह सावंत के लिए काम करते हैं और कभी फ़ीस नहीं लेते, क्योंकि भोजपुरी फ़िल्मों को प्रोत्साहन की ज़रूरत है।

अजय देवगन की भोजपुरी फ़िल्म कौन-सी है?

‘धरती कहे पुकार के’ (2006), जिसमें उन्होंने मनोज तिवारी के साथ एसपी कुणाल सिंह का स्पेशल अपीयरेंस किया।

मिथुन चक्रवर्ती की पहली भोजपुरी फ़िल्म कौन-सी थी?

‘भोले शंकर’ (2008)। यह मोनालिसा की भी पहली भोजपुरी फ़िल्म थी और उस समय की सबसे महंगी भोजपुरी फ़िल्म थी।

धर्मेंद्र ने किस भोजपुरी फ़िल्म में काम किया?

‘देस परदेस’ (2013) में, पवन सिंह के साथ। इसमें रति अग्निहोत्री और क़ादर ख़ान भी थे।

जया बच्चन की भोजपुरी फ़िल्म कौन-सी है?

‘गंगा देवी’ (2012), जिसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ निरहुआ के किरदार की माँ बनीं।

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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