सीधा जवाब: एक्टर राजपाल यादव ने अपने कर्ज़ पर पहली बार खुलकर बात करते हुए कहा कि उन पर अब भी “क़रीब 25-30 करोड़ रुपये” बाक़ी हैं। उनके मुताबिक़ एक वक़्त यह आँकड़ा 50 करोड़ के क़रीब पहुँच गया था, जो 15-20 साल में क़िस्तों, पारिवारिक ज़िम्मेदारियों और कोर्ट केसों के बीच घटकर यहाँ आया है। यह पूरा मामला उनकी डायरेक्टोरियल फ़िल्म ‘अता पता लापता’ से शुरू हुआ था।
बॉलीवुड में जिस चेहरे को देखकर दर्शक हँसने के लिए तैयार हो जाते हैं, उसकी असली कहानी पिछले 15 साल से अदालतों के चक्कर, चेक बाउंस के मुक़दमे और करोड़ों के कर्ज़ की रही है। राजपाल यादव ने अब एक इंटरव्यू में इस पूरे हिसाब-किताब पर पहली बार सीधे बात की है — और आँकड़ा भी ख़ुद बताया है।
राजपाल यादव ने आख़िर कहा क्या
NDTV से बातचीत में राजपाल यादव से सीधा सवाल पूछा गया कि उन पर कुल कितना कर्ज़ बाक़ी है। उनका जवाब था — “क़रीब 25-30 करोड़। एक वक़्त यह आँकड़ा 15-20 साल में लगभग 50 करोड़ तक पहुँच गया था, लेकिन भुगतान, पारिवारिक ज़िम्मेदारियों और कोर्ट केसों ने इसे कम किया।”
उन्होंने केसों की संख्या भी बताई — “2012 से, जब मेरी फ़िल्म की रिलीज़ पर हाईकोर्ट ने पहली बार रोक लगाई, मैंने अलग-अलग जगहों पर 30-35 केस झेले हैं।”
पैसे के लेन-देन को लेकर उनका नज़रिया भी उसी बातचीत में सामने आया — “मैंने क़रीब 150 लोगों को पैसे दिए हैं, 150 से लिए भी हैं। ज़िंदगी में जब आप कुछ बड़ा करने की कोशिश करते हैं, तो 10-20 करोड़ का नुक़सान हो सकता है और 10, 20, 30 करोड़ के कर्ज़ जमा हो जाते हैं।”
साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो आँकड़े बाहर घूम रहे हैं, वो पूरी तस्वीर नहीं दिखाते — “जिसने भी मदद की, मैं उसका बेहद आभारी हूँ। लेकिन जो आँकड़े चल रहे हैं, वो भ्रामक हैं।”
पूरा मामला शुरू कहाँ से हुआ था
कहानी की जड़ 2010 में है। राजपाल यादव अपने डायरेक्शन डेब्यू ‘अता पता लापता’ को बनाने की तैयारी में थे। इसके लिए दिल्ली की एक कंपनी से 5 करोड़ रुपये लिए गए। समझौते के मुताबिक़ तय मुनाफ़े के साथ 8 करोड़ रुपये लौटाए जाने थे, और इस रक़म के गारंटर के तौर पर राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा ने दस्तख़त किए थे।
फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चली। जो चेक जारी किए गए थे, वो बाउंस हो गए — और यहीं से नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मुक़दमों का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज तक ख़त्म नहीं हुआ।
तिहाड़ के वो 14 दिन
2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट से सज़ा हुई, जिस पर 2024 में रोक लगी। लेकिन जब राजपाल यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वो रक़म चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, तो अदालत ने उन्हें सरेंडर करने को कहा।
2 फ़रवरी 2026 को वो तिहाड़ जेल भेजे गए। क़रीब दो हफ़्ते बाद, 16 फ़रवरी 2026 को उन्हें अंतरिम ज़मानत मिली। जेल से बाहर आते ही वो सीधे सेट पर लौटे और ‘वेलकम टू द जंगल’ की शूटिंग शुरू कर दी।
उस वक़्त उन्होंने कहा था — “2027 में मुंबई में बॉलीवुड के मेरे 30 साल पूरे हो जाएँगे। पूरे देश से लोग, बच्चे, बूढ़े और जवान, मेरे साथ हैं।”
जुलाई 2026: हाईकोर्ट ने सज़ा बरक़रार रखी
जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘अता पता लापता’ की फ़ाइनेंसिंग से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव की सज़ा बरक़रार रखी। हालाँकि सज़ा घटाकर हर मामले में तीन महीने कर दी गई और सभी सज़ाएँ साथ-साथ (concurrent) चलेंगी, साथ में आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया।
दबाव यहीं ख़त्म नहीं हुआ। अगस्त 2026 में सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया ने 16.61 करोड़ रुपये की वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की और शाहजहाँपुर की संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी 9 सितंबर को तय की गई है।
पूरा घटनाक्रम — एक नज़र में
| 2010 | ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की कंपनी से ₹5 करोड़; ₹8 करोड़ लौटाने का समझौता |
| 2012 | हाईकोर्ट ने फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाई — राजपाल के मुताबिक़ यहीं से केसों की शुरुआत |
| 2018 | मजिस्ट्रेट कोर्ट से सज़ा |
| 2024 | सज़ा पर रोक |
| 2 फ़रवरी 2026 | दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सरेंडर, तिहाड़ जेल |
| 16 फ़रवरी 2026 | अंतरिम ज़मानत, रिहाई |
| जुलाई 2026 | हाईकोर्ट ने 7 चेक बाउंस केसों में सज़ा बरक़रार रखी, अवधि घटाकर 3-3 महीने |
| अगस्त 2026 | सेंट्रल बैंक की ₹16.61 करोड़ की वसूली कार्रवाई; 9 सितंबर को नीलामी |
| 20 अगस्त 2026 | राजपाल यादव ने ख़ुद बताया — “अभी 25-30 करोड़ बाक़ी हैं” |
इंडस्ट्री कहाँ खड़ी रही
इस पूरे दौर में बॉलीवुड ने राजपाल यादव का साथ छोड़ा नहीं। तिहाड़ से रिहाई के बाद सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से आर्थिक मदद की पेशकश की और उन्हें एक प्रोजेक्ट के लिए साइन भी किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसके बाद सलमान ख़ान, अजय देवगन और वरुण धवन ने भी आर्थिक मदद पहुँचाई।
यही वजह है कि राजपाल यादव बार-बार आभार जताते हैं, लेकिन साथ ही चल रहे आँकड़ों को “भ्रामक” भी कहते हैं — क्योंकि मदद की ख़बरें जितनी तेज़ी से फैलीं, कर्ज़ की असल गणित उतनी ही उलझी रही।
यह ख़बर सिर्फ़ एक एक्टर की नहीं है
राजपाल यादव का मामला हिंदी सिनेमा की उस परत को दिखाता है जो पर्दे पर कभी नहीं आती — एक कामयाब कलाकार का ख़ुद प्रोड्यूसर या डायरेक्टर बनने का फ़ैसला, और उस एक फ़ैसले का 15 साल तक पीछा करना। कोर्ट और नोटिस की ख़बरें बॉलीवुड के लिए नई नहीं हैं; इसी महीने शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ़ को एक विज्ञापन पर FDA का नोटिस मिला था, और इससे पहले सलमान ख़ान को चंडीगढ़ के एक शोरूम मामले में कोर्ट का नोटिस जारी हुआ था।
फ़र्क़ यह है कि उन मामलों में सवाल ब्रैंड और अनुबंध का है, जबकि राजपाल यादव के मामले में सवाल सीधे-सीधे एक आदमी की कमाई, उसकी संपत्ति और उसके परिवार का है। बॉलीवुड की बाक़ी ख़बरों के लिए बॉलीवुड सेक्शन देखते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजपाल यादव पर कुल कितना कर्ज़ है?
ख़ुद उनके मुताबिक़ अभी क़रीब 25-30 करोड़ रुपये बाक़ी हैं। एक वक़्त यह आँकड़ा लगभग 50 करोड़ तक पहुँच गया था।
यह कर्ज़ किस वजह से हुआ?
2010 में उनकी डायरेक्टोरियल फ़िल्म ‘अता पता लापता’ के लिए दिल्ली की एक कंपनी से 5 करोड़ रुपये लिए गए थे, जिन्हें मुनाफ़े के साथ 8 करोड़ लौटाना था। फ़िल्म नहीं चली और चेक बाउंस हो गए।
राजपाल यादव तिहाड़ जेल कब गए थे?
2 फ़रवरी 2026 को, दिल्ली हाईकोर्ट के सरेंडर करने के आदेश के बाद। 16 फ़रवरी 2026 को उन्हें अंतरिम ज़मानत मिल गई थी।
जुलाई 2026 में कोर्ट ने क्या फ़ैसला दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने सात चेक बाउंस मामलों में उनकी सज़ा बरक़रार रखी, लेकिन अवधि घटाकर हर मामले में तीन महीने कर दी, जो साथ-साथ चलेंगी। आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया।
9 सितंबर को क्या होने वाला है?
सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया की 16.61 करोड़ रुपये की वसूली कार्रवाई के तहत शाहजहाँपुर स्थित संपत्तियों की ऑनलाइन नीलामी उस दिन तय है।
क्या इंडस्ट्री ने उनकी मदद की?
हाँ। सोनू सूद ने सार्वजनिक रूप से मदद की पेशकश की और उन्हें प्रोजेक्ट दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सलमान ख़ान, अजय देवगन और वरुण धवन ने भी आर्थिक मदद पहुँचाई।
स्रोत: बॉलीवुड हंगामा, गल्फ न्यूज़











