बिहार और पूर्वांचल में छठ का पहला अर्घ्य जिस आवाज़ के बिना अधूरा लगता है, वह शारदा सिन्हा की है। ‘केलवा के पात पर’ से लेकर ‘काँच ही बाँस के बहंगिया’ तक, उनके गीत हर घाट पर बजते हैं — और उन्हें गुज़रे अब लगभग दो साल हो रहे हैं। 5 नवंबर 2026 को उनकी दूसरी पुण्यतिथि है, और उसके एक हफ़्ते बाद 13 नवंबर से छठ शुरू होगा। ऐसे में यह सवाल फिर से पूछा जा रहा है — शारदा सिन्हा कौन थीं, और उनकी आवाज़ छठ की पहचान कैसे बन गई? इस पेज पर उनकी पूरी कहानी है — गाँव, पढ़ाई, गीत, फ़िल्में, सम्मान और आख़िरी दिन।
शारदा सिन्हा कौन थीं: एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| जन्म | 1 अक्टूबर 1952, हुलास गाँव (राघोपुर प्रखंड), सुपौल ज़िला, बिहार |
| पिता | सुखदेव ठाकुर (नौ बच्चों में अकेली बेटी) |
| पति | ब्रजकिशोर सिन्हा (शादी 1970; ससुराल सिहमा, बेगूसराय) |
| बच्चे | बेटा अंशुमान सिन्हा, बेटी वंदना |
| उपनाम | बिहार कोकिला; कुछ जगह ‘मिथिला की बेगम अख़्तर’ |
| भाषाएँ | मैथिली, भोजपुरी, मगही, हिंदी |
| छठ गीत | 62 गीत, 9 एल्बम (T-Series, HMV, Tips) |
| निधन | 5 नवंबर 2024, रात 9:20 बजे, AIIMS दिल्ली (72 वर्ष) |
| अंतिम संस्कार | 7 नवंबर 2024, पटना, राजकीय सम्मान के साथ |
सुपौल के हुलास गाँव से पटना तक
शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को सुपौल ज़िले के हुलास गाँव में हुआ। वे सुखदेव ठाकुर के नौ बच्चों में इकलौती बेटी थीं। Outlook की रिपोर्ट के मुताबिक़ 1970 के दशक में उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से साहित्य की पढ़ाई की, और बाद में दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से संगीत में डॉक्टरेट किया। इसी वजह से उनके नाम के आगे अक्सर ‘डॉ.’ लिखा जाता है। उन्होंने प्रयाग संगीत समिति से भी शिक्षा ली थी।
1970 में उनकी शादी ब्रजकिशोर सिन्हा से हुई, जिनका घर बेगूसराय के सिहमा गाँव में था। गायिकी के साथ वे संगीत की प्रोफ़ेसर भी रहीं — ETV Bharat के मुताबिक़ वे सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर थीं, जिन्होंने नई पीढ़ी को संगीत सिखाया।
मैथिली लोकगीत से शुरुआत, फिर छठ की आवाज़
शारदा सिन्हा ने शुरुआत मैथिली लोकगीतों से की। IANS के मुताबिक़ 1980 से वे ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर गाने लगीं, और धीरे-धीरे भोजपुरी, मगही और हिंदी में भी उनकी पहचान बनी। पर सबसे बड़ी पहचान छठ के गीतों से मिली — उनकी आवाज़ और यह पर्व एक-दूसरे का पर्याय बन गए।
उन्होंने कुल 62 छठ गीत नौ एल्बमों में गाए, जो T-Series, HMV और Tips जैसी कंपनियों से आए। 2006 के बाद लंबे समय तक उनका कोई नया भक्ति एल्बम नहीं आया, फिर 2016 में वे नए छठ गीतों के साथ लौटीं। उनका आख़िरी छठ एल्बम ‘अरग’ था, जिसमें आठ गीत थे।
शारदा सिन्हा के सबसे मशहूर छठ गीत
- काँच ही बाँस के बहंगिया — आज भी छठ गीतों में सबसे ऊपर गिना जाता है
- केलवा के पात पर
- उठउ सुरुज भइले बिहान
- सकल जगतारिणी हे छठी माता
- गंगा जी के पनिया
- पहिले पहिल छठी मइया — छठ के मौसम में फिर से वायरल हुआ गीत
- दुखवा मिटाईं छठी मइया — उनका आख़िरी रिकॉर्ड किया गीत
अपने छठ गीतों के बारे में उन्होंने एक बार कहा था कि इन गीतों के ज़रिए उन्होंने अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपरा को बचाने की पूरी कोशिश की है। छठ 2026 की चारों तारीख़ें और आज के सितारों के छठ गीतों की तुलना हमारी छठ पूजा 2026 गाइड में है।
बॉलीवुड में शारदा सिन्हा के गीत
लोकगीतों की इस गायिका ने हिंदी फ़िल्मों में बहुत कम गाया, लेकिन जो गाया वह याद रह गया। ‘मैंने प्यार किया’ का ‘काहे तो से सजना’ और ‘हम आपके हैं कौन..!’ का ‘बाबुल’ उन्हें पूरे देश तक ले गए। 2012 में अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर 2’ के ‘तार बिजली’ ने उन्हें नई पीढ़ी से मिलवाया।
| गीत | फ़िल्म | साल |
|---|---|---|
| काहे तो से सजना | मैंने प्यार किया | 1989 |
| बाबुल | हम आपके हैं कौन..! | 1994 |
| तार बिजली | गैंग्स ऑफ़ वासेपुर – पार्ट 2 | 2012 |
| कौन सी नगरिया | चारफुटिया छोकरे | 2014 |
हिंदी फ़िल्मों में गाने वाली भोजपुरी आवाज़ों की पूरी सूची — शारदा सिन्हा से पवन सिंह और खेसारी तक — हमने यहाँ जुटाई है।
पद्म श्री से पद्म विभूषण तक: सम्मान
| सम्मान | साल |
|---|---|
| पद्म श्री | 1991 |
| संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार | 2000 |
| राष्ट्रीय अहिल्याबाई सेवी सम्मान | 2006 |
| पद्म भूषण | 2018 |
| पद्म विभूषण (मरणोपरांत) | 2025 |
पद्म विभूषण की घोषणा 2025 के गणतंत्र दिवस से पहले हुई। मई 2025 में राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में उनके बेटे डॉ. अंशुमान सिन्हा ने यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लिया। राष्ट्रपति ने उन्हें लोक संगीत की “प्रतिष्ठित हस्ती” कहा।
आख़िरी साल: बीमारी, पति का जाना और छठ का पहला दिन
शारदा सिन्हा को 2017 में मल्टीपल मायलोमा — एक तरह का ब्लड कैंसर — होने का पता चला (कुछ रिपोर्ट्स में 2018 लिखा है)। सितंबर 2024 में उनके पति ब्रजकिशोर सिन्हा का ब्रेन हैमरेज से निधन हो गया। कुछ ही हफ़्तों बाद उनकी अपनी तबीयत बिगड़ी और उन्हें दिल्ली के AIIMS में भर्ती कराया गया।
बीमारी के बीच भी छठ का गीत आया। ETV Bharat के मुताबिक़ उनके बेटे ने 30 अक्टूबर 2024 को एक नया छठ गीत जारी किया, और 4 नवंबर को उनके ताज़ा गीत का वीडियो लॉन्च हुआ। यही था ‘दुखवा मिटाईं छठी मइया’ — उनके आधिकारिक YouTube चैनल पर आया उनका आख़िरी पहले से रिकॉर्ड किया गया गीत।
4 नवंबर की शाम उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटे अंशुमान से फ़ोन पर बात की। अगले दिन, 5 नवंबर 2024 को — जिस दिन नहाय-खाय के साथ चार दिन का छठ शुरू हुआ — रात 9:20 बजे उनका निधन हो गया। AIIMS के एक अधिकारी के मुताबिक़ मौत की वजह सेप्टीसीमिया से हुआ ‘रिफ़्रैक्टरी शॉक’ थी। अंशुमान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि छठी मइया ने माँ को अपने पास बुला लिया है।
पूरे देश ने कैसे याद किया
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन को संगीत जगत की “अपूरणीय क्षति” कहा और लिखा कि छठ से जुड़े उनके मधुर गीतों की गूँज हमेशा बनी रहेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनकी आवाज़ के बिना पूर्वांचल की लोक परंपराएँ अधूरी लगती हैं। भोजपुरी सिनेमा की ओर से रवि किशन ने कहा कि उनकी आवाज़ के बिना छठ जैसे त्योहार सूने लगते हैं। गायक सोनू निगम ने छठ के बीच उनके जाने को बेहद दुखद बताया। 7 नवंबर को पटना में — जहाँ कुछ हफ़्ते पहले उनके पति का अंतिम संस्कार हुआ था — राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई।
आज की भोजपुरी गायिकाओं के बीच शारदा सिन्हा
आज भोजपुरी संगीत YouTube व्यूज़ और करोड़ों सब्सक्राइबर वाले चैनलों का खेल बन चुका है। पर शारदा सिन्हा उस दौर की गायिका थीं जब गीत रेडियो और कैसेट से घर-घर पहुँचते थे। उनकी विरासत को व्यूज़ में नहीं गिना जा सकता — यह इस बात में दिखती है कि हर साल छठ पर नए सितारों के नए गीत आते हैं, फिर भी घाट पर सबसे पहले उन्हीं की आवाज़ बजती है। भोजपुरी की बाक़ी प्रमुख गायिकाओं के बारे में हमारी भोजपुरी गायिकाओं की सूची देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शारदा सिन्हा का निधन कब और कैसे हुआ?
5 नवंबर 2024 को रात 9:20 बजे दिल्ली के AIIMS में। वे 2017 से मल्टीपल मायलोमा (ब्लड कैंसर) से जूझ रही थीं; AIIMS के मुताबिक़ मौत सेप्टीसीमिया से हुए शॉक से हुई।
शारदा सिन्हा को ‘बिहार कोकिला’ क्यों कहा जाता है?
बिहार के लोक संगीत — ख़ासकर मैथिली, भोजपुरी और मगही गीतों और छठ गीतों — को घर-घर तक पहुँचाने के लिए। ‘कोकिला’ यानी कोयल, उनकी मीठी आवाज़ के लिए।
शारदा सिन्हा का पहला/सबसे मशहूर छठ गीत कौन सा है?
उनके सबसे ज़्यादा सुने जाने वाले छठ गीतों में ‘काँच ही बाँस के बहंगिया’, ‘केलवा के पात पर’ और ‘उठउ सुरुज भइले बिहान’ शामिल हैं।
शारदा सिन्हा का आख़िरी गीत कौन सा था?
‘दुखवा मिटाईं छठी मइया’, जो उनके निधन से एक दिन पहले, 4 नवंबर 2024 को उनके YouTube चैनल पर आया।
शारदा सिन्हा ने किन फ़िल्मों में गाया?
‘मैंने प्यार किया’ (काहे तो से सजना), ‘हम आपके हैं कौन..!’ (बाबुल), ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर 2’ (तार बिजली) और ‘चारफुटिया छोकरे’ (कौन सी नगरिया)।
शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि कब है?
5 नवंबर। 2026 में यह उनकी दूसरी पुण्यतिथि होगी।
स्रोत: Outlook India (PTI), Wikipedia, IANS, ETV Bharat और Patna Press। ज़्यादा भोजपुरी ख़बरों के लिए देखें भोजपुरी सेक्शन।












