भोजपुरी गायकी में ज़्यादातर बड़े नाम बिहार या पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं — शारदा सिन्हा से लेकर पवन सिंह और शिल्पी राज तक। पर इस भीड़ में एक आवाज़ ऐसी है जिसका भोजपुरी इलाक़े से कोई रिश्ता नहीं था। वह असम से आई, और फिर भी फ़ैंस ने उसे ‘भोजपुरी क्वीन’ का ख़िताब दे दिया।
2016 में एशियन एज को दिए इंटरव्यू में कल्पना पटवारी ने ख़ुद कहा था, “मैं किसी भी तरह से उत्तर प्रदेश या बिहार की मिट्टी से जुड़ी नहीं हूँ।” और अगली ही साँस में, “लेकिन मैं यहाँ के संगीत में पूरी तरह रच-बस गई हूँ, और मुझे कभी बाहरी नहीं समझा गया।” कल्पना पटवारी कौन हैं, असम से भोजपुरी तक कैसे पहुँचीं, उनके बड़े गाने कौन-से हैं, और 2017 में बलिया का वह वीडियो क्यों वायरल हुआ — सब यहाँ है।
कल्पना पटवारी का बायोडाटा
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| नाम | कल्पना पटवारी (Kalpana Patowary) |
| जन्मस्थान | सरभोग, बारपेटा ज़िला, असम |
| जन्मतिथि | किसी भरोसेमंद स्रोत में दर्ज नहीं |
| पिता और पहले गुरु | बिपिन नाथ पटवारी — असम के लोक गायक |
| पढ़ाई | कॉटन कॉलेज, गुवाहाटी से अंग्रेज़ी साहित्य में ग्रेजुएशन; भातखंडे संगीत संस्थान, लखनऊ से संगीत विशारद |
| भोजपुरी करियर | 2003 से |
| भाषाएँ | 32 से ज़्यादा — भोजपुरी, असमिया, हिंदी, बांग्ला, मराठी, अंग्रेज़ी समेत |
| पहली फ़िल्म बतौर अभिनेत्री | ‘चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे’ (2006), दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ |
| पति | परवेज़ ख़ान; दो बच्चे |
| हाल का सम्मान | पंडित राजकुमार शुक्ल कला शिखर सम्मान (अगस्त 2026, बिहार सरकार) |
कल्पना पटवारी कहाँ की हैं?
कल्पना असम के बारपेटा ज़िले के सरभोग की रहने वाली हैं। गायकी उन्हें घर से मिली। पिता बिपिन नाथ पटवारी लोक गायक थे, और उन्होंने ही बेटी को असम की कामरूपी और ग्वालपाड़िया लोक-गायकी सिखाई। विकिपीडिया पर दर्ज NDTV इंडिया के हवाले के मुताबिक़ कल्पना चार साल की उम्र से पिता के साथ मंच पर गाने लगी थीं।
आगे की पढ़ाई दो रास्तों पर चली — गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से अंग्रेज़ी साहित्य में ग्रेजुएशन, और लखनऊ के भातखंडे संस्थान से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में संगीत विशारद। उस्ताद ग़ुलाम मुस्तफ़ा ख़ान से भी उन्होंने तालीम ली।
असम की लड़की ‘भोजपुरी क्वीन’ कैसे बनीं?
कल्पना ने 2003 में भोजपुरी गाना शुरू किया। हिंदी फ़िल्म उद्योग में जगह बनाने के बारे में उनका तर्क सीधा था — एशियन एज से उन्होंने कहा, “हिंदी शोबिज़ मुंबई से चलता है, पटना या बनारस से नहीं।” भोजपुरी फ़िल्मों में उनकी माँग इतनी रही कि उसी इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “मैं एक ही भोजपुरी फ़िल्म में आठ-नौ गाने तक गा रही हूँ।”
‘भोजपुरी क्वीन’ का नाम उन्होंने ख़ुद नहीं रखा। उनके मुताबिक़ यह फ़ैंस और मीडिया से आया, और फिर इंटरव्यू के बैकड्रॉप पर लिखा जाने लगा। 2006 में उन्होंने अभिनय भी किया — मनोज ओझा की ‘चलत मुसाफ़िर मोह लियो रे’ में वे जानकी बनीं, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ।
कल्पना पटवारी के मशहूर गाने
| गाना | फ़िल्म / एल्बम | साल | भाषा |
|---|---|---|---|
| नीला नीला | कन्यादान (संगीत: ज़ुबीन गर्ग) | 2002 | असमिया |
| महंगाई जइसन | माई रे कर दे बिदाई हमार | 2005 | भोजपुरी |
| अइसे जे सज के सवर के | रंगली चुनरिया तोहरे नाम (पवन सिंह के साथ) | 2006 | भोजपुरी |
| तेरे लई | फ़ूल एंड फ़ाइनल (संगीत: हिमेश रेशमिया) | 2007 | हिंदी |
| ऊँचा लंबा कद | वेलकम | 2007 | हिंदी |
| बिल्लू भयंकर | बिल्लू | 2009 | हिंदी |
| इसक से मीठा कुछ भी | आक्रोश (संगीत: प्रीतम) | 2010 | हिंदी |
| चैन कहाँ प्रभु बिना | हर हर ब्योमकेश | 2015 | बांग्ला |
| ओ रे कहारो | बेगम जान (संगीत: अनु मलिक) | 2017 | हिंदी |
| लवंग लतिया | रिश्ते (खेसारी लाल यादव के साथ) | 2025 | भोजपुरी |
यह सूची दिखाती है कि कल्पना की पहचान सिर्फ़ भोजपुरी तक सीमित नहीं रही। ‘वेलकम’ और ‘बेगम जान’ जैसी हिंदी फ़िल्मों से लेकर कन्नड़ और बांग्ला तक उनकी आवाज़ पहुँची। 2008 में वे NDTV इमेजिन के म्यूज़िक रियलिटी शो ‘जुनून – कुछ कर दिखाने का’ में भी नज़र आई थीं।
भिखारी ठाकुर पर एल्बम — जिसने उन्हें अलग बनाया
कल्पना के करियर का सबसे गंभीर काम ‘भोजपुरी के शेक्सपियर’ कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर (1887–1971) पर है। उनका एल्बम ‘द लिगेसी ऑफ़ भिखारी ठाकुर’ 2012 में लंदन की Virgin EMI ने जारी किया। इसमें नौ ट्रैक हैं, सब भिखारी ठाकुर के लिखे, और कुल लंबाई लगभग 61 मिनट है। इसे मॉरीशस में प्रधानमंत्री कार्यालय में वहाँ के उप-प्रधानमंत्री अनिल बचू ने रिलीज़ किया था — मॉरीशस, जहाँ भोजपुरी बोलने वाले गिरमिटिया मज़दूरों के वंशज बड़ी संख्या में रहते हैं।
एल्बम की शुरुआत ‘भिखारी परिचय’ से होती है, और इसमें ‘डगरिया जोहत ना’, ‘बाबूजी’, ‘रामलीला गान’, ‘पियारी सुंदरी’, ‘कलयुग प्रेम’, ‘लगनिया’, ‘रास लीला’ और ‘बिधाता’ जैसे ट्रैक हैं। सबसे लंबा ट्रैक ‘रास लीला’ लगभग 14 मिनट का है।
इसी लाइन पर उनका हाल का काम ‘चंपारण सत्याग्रह’ नाम का एक संगीतमय सफ़रनामा है, जिसमें नील की खेती पर ‘तिनकठिया नील खेती’ गीत शामिल है। इसी के लिए अगस्त 2026 में उन्हें बड़ा सम्मान मिला (नीचे देखें)।
बलिया का वायरल वीडियो (2017) — क्या हुआ था?
दिसंबर 2017 में भिखारी ठाकुर की 130वीं जयंती के कार्यक्रमों के सिलसिले में कल्पना को उत्तर प्रदेश के बलिया में गाने बुलाया गया। डेलीओ की रिपोर्ट के मुताबिक़ वे मंच से भिखारी ठाकुर के गीत गाना चाहती थीं, लेकिन भीड़ बार-बार अश्लील और चटपटे गानों की फ़रमाइश करती रही। 24 दिसंबर को अपलोड हुए एक वीडियो में कल्पना दर्शकों को इसी बात पर डाँटती दिखीं।
वीडियो ने भोजपुरी श्रोताओं को दो हिस्सों में बाँट दिया। कुछ लोग उनके साथ खड़े हुए, तो कुछ ने कहा कि ग़लती भीड़ की ज़रूर थी, पर कल्पना के अपने कुछ गानों ने भी उसी तरह के संगीत को बढ़ावा दिया है। उस वक़्त कल्पना ने लिखा था कि वे भिखारी ठाकुर की विरासत अगली पीढ़ी तक पहुँचने को लेकर “बहुत चिंतित” हैं, और इसका श्रेय नहीं लेना चाहतीं। यही बहस आज भी भोजपुरी संगीत की सबसे बड़ी बहस है — जिसकी झलक हमारी भोजपुरी की 8 मशहूर गायिकाओं वाली सूची में भी दिखती है।
सम्मान और राजनीति
सम्मान: सितंबर 2025 में बिहार सरकार ने उन्हें भोजपुरी संगीत और कला में योगदान के लिए 2023–24 का बिहार कला सम्मान दिया। फिर 23 अगस्त 2026 को पटना में पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती पर हुए राज्य-स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें पंडित राजकुमार शुक्ल कला शिखर सम्मान दिया। राजकुमार शुक्ल वही थे जिन्होंने 1917 में गांधीजी को चंपारण के नील किसानों की लड़ाई में उतरने के लिए मनाया था।
राजनीति: कल्पना ने 12 जुलाई 2018 को पटना में अमित शाह और सुशील मोदी की मौजूदगी में भाजपा जॉइन की थी। 9 अक्टूबर 2020 को वे असम गण परिषद (AGP) में चली गईं और नवंबर 2020 से पार्टी की सांस्कृतिक शाखा की अध्यक्ष रहीं। 2021 के असम विधानसभा चुनाव में उन्होंने AGP उम्मीदवार के तौर पर सरुखेत्री सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन मौजूदा विधायक जाकिर हुसैन सिकदर से हार गईं।
भोजपुरी के बाक़ी गायकों के बारे में पढ़ें — भोजपुरी।
स्रोत: एशियन एज (2016 इंटरव्यू), डेलीओ, विकिपीडिया (कल्पना पटवारी और ‘द लिगेसी ऑफ़ भिखारी ठाकुर’), न्यू केरला/ANI।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कल्पना पटवारी कहाँ की रहने वाली हैं?
असम के बारपेटा ज़िले के सरभोग की। उनका बिहार या उत्तर प्रदेश से कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है।
कल्पना पटवारी को ‘भोजपुरी क्वीन’ क्यों कहते हैं?
2003 से भोजपुरी फ़िल्मों और एल्बमों में लगातार गाने की वजह से। उनके मुताबिक़ यह नाम फ़ैंस और मीडिया ने दिया।
कल्पना पटवारी कितनी भाषाओं में गाती हैं?
32 से ज़्यादा भाषाओं में, जिनमें भोजपुरी, असमिया, हिंदी, बांग्ला, मराठी और अंग्रेज़ी शामिल हैं।
कल्पना पटवारी के पति कौन हैं?
परवेज़ ख़ान। भिखारी ठाकुर वाले एल्बम के प्रोड्यूसरों में भी उनका नाम दर्ज है। दोनों के दो बच्चे हैं।
कल्पना पटवारी किस पार्टी में हैं?
2018 में उन्होंने भाजपा जॉइन की थी और अक्टूबर 2020 में असम गण परिषद में चली गईं। 2021 में सरुखेत्री से AGP उम्मीदवार के रूप में चुनाव हारीं।












