सीधा जवाब: मनोज तिवारी और रानी चटर्जी की ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ को भोजपुरी सिनेमा की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म माना जाता है। लगभग ₹30 लाख में बनी इस फ़िल्म ने कितना कमाया, इस पर स्रोतों में भारी फ़र्क़ है — ₹4.5 करोड़ से ₹54 करोड़ तक।
रिलीज़ के साल पर भी तीन अलग जवाब मिलते हैं: 2003, 2004 और 2005। नीचे हर आंकड़ा उसके स्रोत के साथ है।
ससुरा बड़ा पइसावाला भोजपुरी सिनेमा की उन गिनी-चुनी फ़िल्मों में है जिनके बारे में सब एक बात पर सहमत हैं — इसने इंडस्ट्री की दिशा बदल दी। एक लोकप्रिय लोक गायक को सुपरस्टार बनाया, एक नई अभिनेत्री को उसका नाम और पहचान दी, और साबित किया कि कम बजट की भोजपुरी फ़िल्म भी बड़ा कारोबार कर सकती है।
लेकिन जैसे ही बात आंकड़ों की आती है, सहमति ख़त्म हो जाती है। फ़िल्म ने कितना कमाया, कितने में बनी और किस साल आई — इन तीनों सवालों के अलग-अलग जवाब भरोसेमंद माने जाने वाले स्रोतों में दर्ज हैं। यह पेज उन सबको एक जगह रखता है। भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत की कहानी हमने पहली भोजपुरी फ़िल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ पर लिखी है; यह उसी इतिहास का अगला बड़ा पड़ाव है।
ससुरा बड़ा पइसावाला: फ़िल्म एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| निर्देशक | अजय सिन्हा |
| निर्माता | सुधाकर पांडे |
| मुख्य कलाकार | मनोज तिवारी (राजा), रानी चटर्जी (रानी), बलकार सिंह बाली (छेदी) |
| संगीत | लाल सिन्हा (बतौर संगीतकार पहली फ़िल्म) |
| गीत | विनय बिहारी |
| गायक | श्रेया घोषाल, उदित नारायण, कल्पना पटवारी, प्रदीप पंडित, दीपा नारायण झा |
| म्यूज़िक लेबल | टी-सीरीज़ |
| वितरक | बालाजी सिनेविज़न प्राइवेट लिमिटेड |
| अवधि | 164 मिनट |
| सीक्वल | ‘ससुरा बड़ा पइसावाला 2’ — 21 फ़रवरी 2020 |
क्रेडिट की यह जानकारी विकिपीडिया के फ़िल्म पेज से है। कहानी एक अमीर ससुर और ग़रीब दामाद के टकराव की है — एक लड़का और लड़की प्रेम में पड़ते हैं, विरोध के बावजूद शादी करते हैं, और फिर झगड़े के बाद सुलह तक पहुँचते हैं।
ससुरा बड़ा पइसावाला ने कितना कमाया? चार स्रोत, चार जवाब
यह फ़िल्म की सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली बात है, और इसका कोई एक पक्का जवाब नहीं है। हमारे पास मौजूद स्रोत ये कहते हैं:
| स्रोत | बजट | कमाई |
|---|---|---|
| विकिपीडिया (फ़िल्म पेज) | ₹35–40 लाख | ₹4.5–9 करोड़ |
| DNA इंडिया (अगस्त 2025) | ₹30 लाख | ₹35 करोड़ वर्ल्डवाइड — “बजट का 120 गुना” |
| न्यूज़24 (मई 2026) | ₹30 लाख | ₹36 करोड़ |
| मनोज तिवारी ख़ुद (जनवरी 2026) | ₹30 लाख | ₹54 करोड़ |
सबसे बड़ा आंकड़ा फ़िल्म के हीरो का अपना है। जनवरी 2026 में मुंबई में इंडियन नेशनल सिने एकेडमी (INCA) के लॉन्च पर, बॉलीवुड हंगामा के मुताबिक़ मनोज तिवारी ने कहा कि फ़िल्म ₹30 लाख में बनी थी और उसने ₹54 करोड़ का कारोबार किया — फिर भी न निर्देशक को कोई अवॉर्ड मिला, न लेखक को सम्मान। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ख़ुद अभिनेता को भी कोई अवॉर्ड नहीं मिला।
DNA इंडिया और न्यूज़24 के ₹35–36 करोड़ वाले आंकड़े आपस में मेल खाते हैं — ₹30 लाख का 120 गुना ₹36 करोड़ ही होता है। दूसरी ओर विकिपीडिया का ₹4.5–9 करोड़ वाला अनुमान इन सबसे कई गुना छोटा है, और उसका बजट भी थोड़ा ज़्यादा है।
इतना बड़ा फ़र्क़ क्यों?
इनमें से किसी भी आंकड़े के साथ टिकट-दर-टिकट का कोई स्वतंत्र हिसाब सार्वजनिक नहीं है, जैसा आज बड़ी हिंदी फ़िल्मों के लिए ट्रैकिंग वेबसाइटें देती हैं। आज के आंकड़े ज़्यादातर फ़िल्म से जुड़े लोगों की बातों और बाद की रिपोर्टों से आते हैं। इसलिए सबसे ईमानदार जवाब यह है: फ़िल्म ने अपनी लागत का कई गुना कमाया, इस पर सब सहमत हैं — ठीक कितना, यह तय नहीं है। भोजपुरी सिनेमा पर विकिपीडिया का लेख भी सावधानी से सिर्फ़ इतना कहता है कि इसने अपनी लागत से “दस गुना से ज़्यादा” कमाया।
जिस बात पर सब सहमत हैं, वह है फ़िल्म का दर्जा। विकिपीडिया के मुताबिक़ जून 2022 तक यह भोजपुरी इतिहास की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म थी, और DNA इंडिया भी इसे यही दर्जा देता है।
कितने दिन चली फ़िल्म?
विकिपीडिया ने ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि फ़िल्म को लगातार चार-पाँच महीने स्क्रीन मिलीं और सब हाउसफ़ुल रहीं। न्यूज़24 इससे आगे जाकर कहता है कि कुछ जगहों पर यह 65 हफ़्ते तक सिनेमाघरों में रही। DNA इंडिया के मुताबिक़ उस समय इसने कई बॉलीवुड फ़िल्मों को भी पीछे छोड़ दिया था।
रिलीज़ कब हुई: 2003, 2004 या 2005?
यह फ़िल्म का दूसरा अनसुलझा सवाल है, और यहाँ भी जवाब इस पर निर्भर करता है कि आप किसे पढ़ रहे हैं।
| स्रोत | रिलीज़ वर्ष |
|---|---|
| विकिपीडिया — फ़िल्म का पेज और मनोज तिवारी का पेज | 2003 |
| मनोज तिवारी ख़ुद (INCA लॉन्च, जनवरी 2026) | 2004 |
| विकिपीडिया — ‘भोजपुरी सिनेमा’ लेख | 2005 |
यह असंगति हमारी अपनी पुरानी कवरेज में भी दिखती है: रानी चटर्जी की प्रोफ़ाइल में फ़िल्म का साल 2004 लिखा है और भोजपुरी फ़िल्में कहाँ देखें वाले पेज में 2005। दोनों के पीछे स्रोत मौजूद हैं, और यही वजह है कि यहाँ किसी एक साल को सही घोषित नहीं किया गया। रिलीज़ की सटीक तारीख़ हमें किसी भी स्रोत में नहीं मिली।
मनोज तिवारी: गायक से सुपरस्टार
फ़िल्म से पहले मनोज तिवारी भोजपुरी के एक चहेते लोक गायक थे। भोजपुरी सिनेमा पर विकिपीडिया के लेख के मुताबिक़ इसी फ़िल्म ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाया। उनके विकिपीडिया पेज के अनुसार 1 फ़रवरी 1971 को जन्मे तिवारी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से M.P.Ed. किया था, और यह उनकी पहली फ़िल्म थी।
इसके बाद ‘दरोगा बाबू आई लव यू’, ‘बंधन टूटे ना’, ‘हमके माफ़ी देई दा’ (2004), ‘धरती पुत्र’ (2005) और ‘देशद्रोही’ (2008) जैसी फ़िल्में आईं। उनके विकिपीडिया पेज के मुताबिक़ BBC ने 2005 में तिवारी और रवि किशन को भोजपुरी फ़िल्म बाज़ार के सबसे बड़े पुरुष सितारे बताया था। 2010 में वे ‘बिग बॉस 4’ में आए और 62वें दिन बाहर हुए। 2014 में वे BJP के टिकट पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद बने।
आज उनकी बेटी रीति तिवारी ‘बिग बॉस 20’ के घर में हैं — वे कौन हैं, यह हमारी प्रोफ़ाइल में पढ़ें।
रानी चटर्जी को नाम भी इसी फ़िल्म ने दिया
फ़िल्म की हीरोइन रानी चटर्जी का असली नाम साबिहा शेख़ है। ‘रानी चटर्जी’ नाम उन्होंने ख़ुद नहीं चुना था — वह इसी फ़िल्म के सेट पर उन्हें दिया गया, और फ़िल्म में उनके किरदार का नाम भी ‘रानी’ ही था। न्यूज़24 के मुताबिक़ इस फ़िल्म ने रानी चटर्जी को बड़ी पहचान दिलाई। उनके पूरे सफ़र के लिए रानी चटर्जी कौन हैं पढ़ें।
भोजपुरी इंडस्ट्री पर असर
फ़िल्म का असर समझने के लिए उससे पहले का हाल देखना ज़रूरी है। विकिपीडिया के भोजपुरी सिनेमा लेख के मुताबिक़ 1977 से 2001 के बीच इंडस्ट्री ने लगभग 150 फ़िल्में बनाईं — औसतन साल में छह। 1990 तक यह रफ़्तार भी धीमी पड़ गई थी। 2001 में ‘सैयां हमार’ ने वापसी की शुरुआत की और रवि किशन को स्टार बनाया।
‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ और ‘पंडितजी बताईं ना बियाह कब होई’ ने उस वापसी को उद्योग में बदल दिया — दोनों ने अपनी लागत का दस गुना से ज़्यादा कमाया। DNA इंडिया के शब्दों में इस फ़िल्म के बाद भोजपुरी सिनेमा में फ़िल्मों की “क्रांति” आई। 2008 तक मिथुन चक्रवर्ती की ‘भोले शंकर’ उस समय की सबसे बड़ी और सबसे महँगी भोजपुरी फ़िल्म बनी, और इंडस्ट्री साल में 100 से ज़्यादा फ़िल्में बनाने लगी। साल में छह फ़िल्मों से सौ से ज़्यादा तक — यह बदलाव क़रीब एक दशक में हुआ।
न्यूज़24 ने इस फ़िल्म की सबसे बड़ी सीख यही बताई है कि अच्छी कहानी और दमदार अभिनय कम बजट में भी भारी मुनाफ़ा दे सकते हैं — और लागत के मुक़ाबले कमाई का इसका अनुपात बाद के दो दशकों में कोई भोजपुरी फ़िल्म नहीं तोड़ पाई।
ससुरा बड़ा पइसावाला कहाँ देखें?
फ़िल्म का संगीत टी-सीरीज़ का है, और यूट्यूब पर टी-सीरीज़ के नाम से पूरी फ़िल्म अपलोड है। भोजपुरी फ़िल्में किस ऐप और किस यूट्यूब चैनल पर मिलती हैं, इसकी पूरी गाइड यहाँ है। भोजपुरी सिनेमा की बाक़ी कवरेज भोजपुरी सेक्शन में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भोजपुरी की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म कौन सी है?
मनोज तिवारी और रानी चटर्जी की ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ को भोजपुरी इतिहास की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फ़िल्म माना जाता है।
ससुरा बड़ा पइसावाला का बजट कितना था?
ज़्यादातर स्रोत, और ख़ुद मनोज तिवारी, ₹30 लाख बताते हैं। विकिपीडिया ₹35 से 40 लाख लिखता है।
ससुरा बड़ा पइसावाला ने कितनी कमाई की?
इस पर एक राय नहीं है। विकिपीडिया ₹4.5–9 करोड़ बताता है, DNA इंडिया ₹35 करोड़, न्यूज़24 ₹36 करोड़, और मनोज तिवारी ने जनवरी 2026 में ₹54 करोड़ कहा।
ससुरा बड़ा पइसावाला कब रिलीज़ हुई थी?
विकिपीडिया का फ़िल्म पेज 2003 बताता है, मनोज तिवारी ने 2004 कहा है, और विकिपीडिया का भोजपुरी सिनेमा लेख 2005 लिखता है।
ससुरा बड़ा पइसावाला का निर्देशक कौन था?
फ़िल्म का निर्देशन अजय सिन्हा ने किया था और निर्माता सुधाकर पांडे थे।
क्या ससुरा बड़ा पइसावाला का सीक्वल आया है?
हाँ, ‘ससुरा बड़ा पइसावाला 2’ 21 फ़रवरी 2020 को रिलीज़ हुई थी।












