तमिल फ़िल्म संगीत का एक पूरा दौर आज ख़त्म हो गया। ‘तेनिसई तेंड्रल’ के नाम से मशहूर संगीतकार देवा अब नहीं रहे। सिनेमा एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्हें शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे चेन्नई के सूर्या हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ अचानक उनकी मौत हो गई। चेन्नई के अख़बार डीटी नेक्स्ट ने लिखा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। मौत की परिस्थितियों पर और जानकारी अभी आनी बाकी है।
90 के दशक में जब एक तरफ़ इलैयाराजा थे और दूसरी तरफ़ नए-नए आए ए.आर. रहमान, उस दौर में भी देवा के गानों के अपने अलग चाहने वाले थे। उत्तर भारत में बहुत लोग उनका नाम भले न जानते हों, लेकिन रजनीकांत की फ़िल्मों में ‘सुपरस्टार’ नाम के साथ जो धुन बजती है, उसे बनाने का श्रेय देवा को ही दिया जाता है।
संगीतकार देवा का निधन: अब तक क्या पता है
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| निधन | 17 अक्टूबर 2026 (शनिवार), सुबह करीब 8:30 बजे |
| जगह | सूर्या हॉस्पिटल, चेन्नई |
| उम्र | 75 साल |
| वजह | डीटी नेक्स्ट के मुताबिक़ दिल का दौरा; बाकी रिपोर्ट्स में अचानक तबीयत बिगड़ना |
| असली नाम | देवनेसन चोक्कलिंगम |
| जन्म | 20 नवंबर 1950, मायलापुर (चेन्नई) |
| फ़िल्में | 400 से ज़्यादा — तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम |
| परिवार | बेटा श्रीकांत देवा (संगीतकार), भाई सबेश–मुरली (संगीतकार जोड़ी) |
अंतिम संस्कार और फ़िल्म जगत की श्रद्धांजलियों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इत्तेफ़ाक़ यह भी है कि आज ही तमिल के महान गीतकार कन्नदासन की पुण्यतिथि है — न्यूज़18 तमिल ने इस बात का ख़ास ज़िक्र किया है।
“गाना एक आँख, मेलोडी दूसरी” — देवा की पहचान
देवा का नाम सबसे ज़्यादा ‘गाना’ के साथ जुड़ता है। यहाँ ‘गाना’ का मतलब सिर्फ़ गीत नहीं है — यह उत्तरी चेन्नई की बस्तियों में गाई जाने वाली एक लोक-शैली है, जिसकी तेज़ ताल और सीधे-सादे बोल होते हैं। देवा ने इस शैली को फ़िल्मों में लाकर मुख्यधारा तक पहुँचाया।
बीबीसी तमिल को दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “गाना मेरी ख़ासियत बन गए। मेलोडी देने वाले तो बहुत संगीतकार हैं, मैं भी उन्हीं में से एक बनकर रह जाता। गाना की वजह से ही मैं अलग दिखता हूँ।” हाल के एक कार्यक्रम में उन्होंने इसे और छोटे में कहा — “गाना एक आँख है, तो मेलोडी दूसरी।”
बीबीसी तमिल ने एक मज़ेदार किस्सा भी याद किया है। 2024 की फ़िल्म ‘लब्बर पंधु’ के एक सीन में बस में गाना बज रहा है, एक बुज़ुर्ग कहते हैं “राजा तो राजा है” (यानी इलैयाराजा), और एक नौजवान टोकता है कि यह तो देवा का गाना है। देवा के बहुत से गाने ऐसे ही सुने गए — लोग गुनगुनाते रहे, पर नाम किसी और का समझते रहे।
भक्ति एल्बम से फ़िल्मों तक का सफ़र
विकिपीडिया के मुताबिक़ देवा का बचपन तंगी में बीता और उन्होंने शुरू में कोई औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली। हारमोनियम उन्होंने ख़ुद सीखा। 1973 में उन्होंने संगीतकार चंद्रबोस के साथ मिलकर एक म्यूज़िकल ग्रुप बनाया। 80 के दशक में वे सैकड़ों भक्ति एल्बम बना चुके थे।
मोड़ 1985 में आया। तिरुवेरकाडु मंदिर में हुए एक सम्मान समारोह में दिग्गज संगीतकार एम.एस. विश्वनाथन ने उनकी खुलकर तारीफ़ की, फ़िल्म इंडस्ट्री से उन्हें मौका देने की अपील की और उन्हें ‘तेनिसई तेंड्रल’ (मीठे संगीत की बयार) का ख़िताब दिया। कुछ ही महीनों में उन्हें पहली फ़िल्म मिल गई।
उनकी पहली फ़िल्म को लेकर रिपोर्ट्स में थोड़ा फ़र्क है। न्यूज़18 तमिल और विकिपीडिया के मुताबिक़ उनकी शुरुआत 1986 की ‘मट्टुक्कारा मन्नारु’ से हुई, जबकि बीबीसी तमिल 1989 की ‘मनसुक्केत्त महारासा’ को उनकी पहली फ़िल्म बताता है। विकिपीडिया इसे साफ़ करता है — 1986 वाली पहली फ़िल्म थी, और 1989 वाली पहली बड़े स्टार वाली फ़िल्म। असली पहचान प्रशांत की ‘वैगासी पोरंदाच्चु’ से मिली।
रजनीकांत के साथ ‘अन्नामलै’ और ‘बाशा’
1992 में के. बालचंदर के प्रोडक्शन में बनी रजनीकांत की ‘अन्नामलै’ का संगीत देवा ने दिया। यह वही साल था जब ए.आर. रहमान ‘रोजा’ से आए थे, फिर भी ‘अन्नामलै’ उस साल की सबसे ज़्यादा कमाई वाली तमिल फ़िल्म बनी। इसके बाद ‘बाशा’ (1995) और ‘अरुणाचलम’ (1997) में भी देवा ने रजनीकांत के एंट्री गाने और बैकग्राउंड स्कोर बनाए।
2022 में ‘देवा देवा तान’ नाम के एक संगीत कार्यक्रम में रजनीकांत ने ख़ुद मंच से देवा के इस दौर की तारीफ़ की थी। संयोग यह है कि रजनीकांत की नई फ़िल्म ‘जेलर 2’ दो दिन पहले ही सिनेमाघरों में आई है — उसकी पहले दिन की बुकिंग और रिव्यू यहाँ पढ़ें।
अजीत और विजय के शुरुआती हिट गाने
90 के दशक में देवा तमिल के सबसे ज़्यादा काम करने वाले संगीतकारों में थे — विकिपीडिया के मुताबिक़ अकेले 1996 में उन्होंने 36 फ़िल्मों में संगीत दिया। अजीत कुमार और विजय को स्टार बनाने वाली कई फ़िल्मों का संगीत उन्हीं का था।
| साल | फ़िल्म | हीरो |
|---|---|---|
| 1992 | अन्नामलै | रजनीकांत |
| 1995 | बाशा | रजनीकांत |
| 1995 | आसै | अजीत कुमार |
| 1996 | कादल कोट्टै | अजीत कुमार |
| 1997 | नेर्रुक्कु नेर | विजय, सूर्या |
| 1997 | अरुणाचलम | रजनीकांत |
| 1998 | प्रियमुडन | विजय |
| 1999 | वाली | अजीत कुमार |
| 2000 | कुशी | विजय |
बीबीसी तमिल से बात करते हुए तिरुनेलवेली के स्टेज सिंगर तियागराजन ने कहा था कि 90 के दशक के लगभग हर बड़े हीरो के नाम देवा के साथ कम से कम एक हिट गाना है, और तीन घंटे के किसी कॉन्सर्ट में आधा वक़्त लोग देवा के ही गाने माँगते हैं।
सम्मान और आख़िरी काम
देवा को 1990 में पहला तमिलनाडु स्टेट फ़िल्म अवॉर्ड (सर्वश्रेष्ठ संगीतकार) मिला और 1995 में ‘आसै’ के लिए दूसरा। 1992 में तमिलनाडु सरकार ने उन्हें ‘कलैमामणि’ सम्मान दिया। कन्नड़ फ़िल्म ‘अमृतवर्षिणी’ के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड भी मिला।
न्यूज़18 तमिल के मुताबिक़ उन्होंने आख़िरी बार ‘चारुकेसी’ में संगीत दिया था। हाल के सालों में वे संगीत कम दे रहे थे, लेकिन कुछ फ़िल्मों में बतौर गायक और कलाकार नज़र आए। 2014 में अनिरुद्ध रविचंदर ने ‘मान कराटे’ के एक गाना-शैली वाले गीत को गाने के लिए उन्हें ही चुना था।
संगीत वाला परिवार
देवा के बेटे श्रीकांत देवा भी फ़िल्म संगीतकार हैं। उनके भाई सबेश और मुरली ‘सबेश–मुरली’ नाम की संगीतकार जोड़ी के रूप में मशहूर हुए — ‘ऑटोग्राफ़’ और ‘पोक्किशम’ जैसी फ़िल्मों का संगीत इसी जोड़ी का था। देवा अपने करियर का श्रेय अक्सर इन्हीं भाइयों को देते थे। सबेश का निधन पिछले साल अक्टूबर 2025 में 68 साल की उम्र में हो गया था। अभिनेता जय उनके भतीजे हैं।
हाल के महीनों में दक्षिण भारतीय सिनेमा ने कई दिग्गज खोए हैं — इसी महीने निर्देशक सिंगीतम श्रीनिवास राव और अगस्त में अभिनेत्री सौकार जानकी का निधन हुआ। तमिल सिनेमा की बाकी ख़बरें हमारे तमिल सेक्शन में पढ़ें।
स्रोत: सिनेमा एक्सप्रेस, बीबीसी तमिल, डीटी नेक्स्ट। यह ख़बर अपडेट की जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
संगीतकार देवा का निधन कब हुआ?
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे, चेन्नई के सूर्या हॉस्पिटल में।
देवा की उम्र कितनी थी?
75 साल। उनका जन्म 20 नवंबर 1950 को चेन्नई के मायलापुर में हुआ था।
देवा की मौत कैसे हुई?
डीटी नेक्स्ट के मुताबिक़ उन्हें दिल का दौरा पड़ा। बाकी रिपोर्ट्स में अचानक तबीयत बिगड़ने की बात है। परिवार की ओर से अभी कोई विस्तृत बयान नहीं आया है।
देवा ने रजनीकांत की किन फ़िल्मों में संगीत दिया?
‘अन्नामलै’ (1992), ‘बाशा’ (1995) और ‘अरुणाचलम’ (1997) — इन फ़िल्मों के एंट्री गाने और बैकग्राउंड स्कोर उन्हीं के थे।
‘तेनिसई तेंड्रल’ का क्या मतलब है?
‘मीठे संगीत की बयार’। यह ख़िताब उन्हें 1985 में संगीतकार एम.एस. विश्वनाथन ने दिया था।
श्रीकांत देवा कौन हैं?
देवा के बेटे, जो ख़ुद भी तमिल फ़िल्मों के संगीतकार हैं।












