सीधा जवाब: दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का 21 अगस्त 2026 को 94 साल की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। उम्र से जुड़ी दिक्कतों के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और दोपहर क़रीब 1:59 बजे आईसीयू में उन्होंने आख़िरी साँस ली। सात दशक लंबे करियर में उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी मिलाकर क़रीब 400 फ़िल्में कीं। अंतिम संस्कार 22 अगस्त, शनिवार को चेन्नई के बेसंट नगर श्मशान घाट में किया गया।
एक इंटरव्यू में सौकार जानकी से पूछा गया था कि ज़िंदगी से उनकी आख़िरी ख़्वाहिश क्या है। जवाब में कोई अवॉर्ड नहीं था, कोई अधूरा रोल नहीं था। उन्होंने कहा था — “ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं। पर्दा गिरने पर चले जाना चाहिए। तैयार रहो और शांति से चले जाओ, बस यही मेरी इकलौती ख़्वाहिश है।”
94 साल की उम्र में, सात दशक तक कैमरे के सामने रहने के बाद, उनकी वही ख़्वाहिश पूरी हुई।
आख़िरी दिन
उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्हें चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान आईसीयू में 21 अगस्त 2026 को दोपहर क़रीब 1:59 बजे उनका निधन हो गया।
शनिवार सुबह से आम लोगों के लिए अंतिम दर्शन का इंतज़ाम किया गया, जहाँ बड़ी संख्या में प्रशंसक और फ़िल्म जगत के लोग पहुँचे। 22 अगस्त, शनिवार की दोपहर बाद चेन्नई के बेसंट नगर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। वे अपने पीछे तीन बच्चे, चार नाती-पोते और चार परनाती-परपोते छोड़ गई हैं।
‘सौकार’ नाम एक फ़िल्म से आया था
उनका असली नाम शंकरमंचि जानकी था। जन्म 12 दिसंबर 1931 को राजमुंदरी (अब आंध्र प्रदेश) में हुआ।
1950 में आई तेलुगु फ़िल्म ‘शावुकारु’ ने उन्हें वह पहचान दी जो आगे चलकर उनके नाम का हिस्सा ही बन गई — लोग उन्हें हमेशा के लिए “सौकार जानकी” कहने लगे। यही वह फ़िल्म भी थी जिसमें वे एन. टी. रामाराव के शुरुआती दौर में उनकी नायिका बनीं। तेलुगु सिनेमा में उस दौर की शुरुआत जिन चेहरों से हुई, वे उनमें से एक थीं।
सात दशक, पाँच भाषाएँ, क़रीब 400 फ़िल्में
उनका करियर 1949 से लेकर 2023 तक फैला रहा — यानी वह दौर भी जब फ़िल्में ब्लैक एंड व्हाइट थीं, और वह दौर भी जब उनके पोतों की पीढ़ी ओटीटी देख रही थी।
तेलुगु में ‘रोजुलु मारायि’ (1955), ‘पांडुरंग महात्म्यम’ (1957), ‘डॉक्टर चक्रवर्ती’ (1964) और ‘अक्का चेल्लेलु’ (1970) जैसी फ़िल्में उनके नाम रहीं। तमिल में ‘नीरकुमिळि’ (1965), ‘एदिर नीचल’ (1968), ‘इरु कोडुगल’ (1969) और रजनीकांत के साथ ‘थिल्लू मुल्लू’ (1981) आज भी याद की जाती हैं।
कन्नड़ सिनेमा में उन्होंने डॉ. राजकुमार के साथ कई फ़िल्में कीं — और यह सिलसिला इतना लंबा चला कि पहले वे उनकी नायिका बनीं और बाद के दौर में माँ की भूमिकाओं में आईं। नायिका से चरित्र भूमिकाओं तक का यह सफ़र उन्होंने बिना किसी शोर के तय किया।
करियर एक नज़र में
| असली नाम | शंकरमंचि जानकी |
| जन्म | 12 दिसंबर 1931, राजमुंदरी |
| निधन | 21 अगस्त 2026, चेन्नई — 94 वर्ष |
| फ़िल्में | क़रीब 400 — तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, हिंदी |
| करियर | 1949 – 2023 (सात दशक) |
| पहचान देने वाली फ़िल्म | ‘शावुकारु’ (1950) |
| बड़े सम्मान | पद्म श्री (2022), कलैमामणि (1969), फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट – साउथ (1984), कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार (2015) |
| परिवार | तीन बच्चे; बहन कृष्ण कुमारी भी अभिनेत्री थीं |
15 साल की उम्र में शादी, और एक अकेली ज़िंदगी
पर्दे पर वे बड़े परिवारों की धुरी बनती रहीं, पर अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर वे हमेशा बेहद साफ़गोई से बात करती थीं।
1947 में, महज़ 15 साल की उम्र में उनकी शादी शंकरमंचि श्रीनिवास राव से हुई। बच्चों के बड़े होने के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए। इस बारे में उन्होंने कहा था कि उन्होंने “पति के साथ ज़्यादा वक़्त नहीं बिताया” और यह भी माना कि उन्होंने एक “अकेली ज़िंदगी जी।”
अभिनय में आने की वजह भी उन्होंने कभी रोमांटिक बनाकर नहीं बताई। उनका कहना था — “मैंने अभिनय इसलिए नहीं चुना कि मुझे इसमें दिलचस्पी थी; यह बस जीविका का ज़रिया था।” इसके बावजूद ख़ुद को वे “लाइलाज रोमांटिक” कहती थीं।
श्रद्धांजलि: चिरंजीवी से रजनीकांत तक
ख़बर आते ही दक्षिण के सिनेमा और सियासत, दोनों से शोक संदेश आने लगे।
मेगास्टार चिरंजीवी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि ‘शावुकारु’ से शुरू हुआ उनका सिनेमाई सफ़र क़रीब सात दशक और कई भाषाओं तक फैला रहा, और उनके सहज अभिनय ने अलग-अलग किरदारों में जान डाल दी। जूनियर एनटीआर ने कहा कि उनका सफ़र और उनके निभाए किरदार दर्शकों की यादों में हमेशा रहेंगे। विष्णु मंचु ने लिखा कि उनकी विरासत पीढ़ियों तक ज़िंदा रहेगी, प्रभुदेवा ने संक्षेप में लिखा — “RIP, सौकार जानकी अम्मा।” अभिनेत्री राधिका शरतकुमार ने उन्हें “मज़बूत, स्वतंत्र और रास्ता बनाने वाली” बताया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन, अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी समेत कई नेताओं ने शोक जताया। रजनीकांत, कमल हासन, शरतकुमार, नासर, निर्देशक टी. राजेंद्र और कवि वैरामुत्तु ने भी श्रद्धांजलि दी।
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दक्षिण सिनेमा से जुड़ी और ख़बरें — 47 साल बाद रजनीकांत और कमल हासन फिर एक फ़्रेम में आ रहे हैं, और कमल हासन ने ख़ुद को सिनेमा का सबसे बुज़ुर्ग Gen Z बताया है। इसी हफ़्ते हॉलीवुड ने भी हेडन पैनेटियर को खो दिया। बाक़ी अपडेट के लिए तमिल सेक्शन देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सौकार जानकी का निधन कब हुआ?
21 अगस्त 2026 को चेन्नई में, 94 साल की उम्र में। इलाज के दौरान आईसीयू में दोपहर क़रीब 1:59 बजे उनका निधन हुआ।
उन्हें ‘सौकार’ क्यों कहा जाता था?
1950 की तेलुगु फ़िल्म ‘शावुकारु’ से मिली पहचान के बाद यह नाम उनके साथ हमेशा के लिए जुड़ गया।
उन्होंने कितनी फ़िल्में कीं?
क़रीब 400 — तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी में। उनका करियर 1949 से 2023 तक चला।
उन्हें कौन-कौन से बड़े सम्मान मिले?
पद्म श्री (2022), कलैमामणि (1969), फ़िल्मफ़ेयर लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड – साउथ (1984), कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार (2015) और दो नंदी पुरस्कार।
अंतिम संस्कार कब और कहाँ हुआ?
22 अगस्त 2026, शनिवार की दोपहर बाद चेन्नई के बेसंट नगर श्मशान घाट में।
उनके परिवार में कौन है?
तीन बच्चे, चार नाती-पोते और चार परनाती-परपोते। उनकी बहन कृष्ण कुमारी भी जानी-मानी अभिनेत्री थीं।
स्रोत: IANS Live, Deccan Chronicle, BollywoodShaadis, Wikipedia













