मकरंद अनासपुरे कौन हैं: फ़िल्मों में एंट्री नाना पाटेकर ने दिलाई, साथ बनाया नाम फ़ाउंडेशन — अंतिम संस्कार में फूट-फूटकर रोए

By Riya Mehta

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मकरंद अनासपुरे कौन हैं: फ़िल्मों में एंट्री नाना पाटेकर ने दिलाई, साथ बनाया नाम फ़ाउंडेशन — अंतिम संस्कार में फूट-फूटकर रोए
सीधा जवाब: मकरंद अनासपुरे (जन्म 22 जुलाई 1973, औरंगाबाद) मराठी फ़िल्मों और रंगमंच के जाने-माने अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं। वह फ़िल्मों में अपनी एंट्री का श्रेय नाना पाटेकर को देते हैं, और सितंबर 2015 में दोनों ने मिलकर किसानों के लिए नाम फ़ाउंडेशन बनाया था।

8 अक्टूबर की रात पुणे के पास डोणजे फ़ार्महाउस पर जब नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार हो रहा था, तो भीड़ में एक चेहरा सबसे ज़्यादा टूटा हुआ दिखा — मकरंद अनासपुरे। IANS के मुताबिक़ वह परिवार के बग़ल में खड़े होकर फूट-फूटकर रो पड़े, नाना के एक रिश्तेदार को गले लगाया और रोते हुए दूसरे परिजन को संभाला। उसके बाद से गूगल पर लोग खोज रहे हैं कि मकरंद अनासपुरे कौन हैं और नाना से उनका रिश्ता क्या था।

जवाब सिर्फ़ दोस्ती नहीं है। मकरंद को फ़िल्मों तक पहुँचाने वाले नाना थे, और पिछले एक दशक में दोनों का नाम महाराष्ट्र के सूखा-पीड़ित किसानों के लिए किए गए काम से जुड़ा रहा।

मकरंद अनासपुरे कौन हैं: एक नज़र में

जानकारीविवरण
पूरा नाममकरंद मधुकर अनासपुरे
जन्म22 जुलाई 1973, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
पढ़ाईप्राथमिक शिक्षा बीड ज़िले में; सरस्वती भुवन कॉलेज से ड्रामा में ग्रेजुएशन
पेशाअभिनेता, निर्देशक, निर्माता, टीवी होस्ट
पहचानमराठी की मराठवाड़ी बोली वाला अंदाज़, कॉमेडी
पत्नीशिल्पा अनासपुरे (शादी 30 नवंबर 2001, पुणे)
बच्चेबेटा इंद्रनील, बेटी इंद्रायणी
सामाजिक कामनाना पाटेकर के साथ नाम फ़ाउंडेशन के सह-संस्थापक (2015)

नुक्कड़ नाटकों से मराठी सिनेमा तक

विकिपीडिया के मुताबिक़ मकरंद अनासपुरे का जन्म औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के एक मराठी परिवार में हुआ। स्कूली पढ़ाई बीड ज़िले में हुई और ड्रामा में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने औरंगाबाद में 400 से 500 नुक्कड़ नाटक किए। यही मंच का अनुभव आगे उनकी सबसे बड़ी ताक़त बना।

पहचान उन्हें ‘साताच्या आत घरात’ और ‘कायद्याचं बोला’ से मिली। इसके बाद ‘दे धक्का’, ‘गल्लीत गोंधळ दिल्लीत मुजरा’, ‘गाढवाचं लग्न’ और ‘साडे माडे तीन’ जैसी फ़िल्मों ने उन्हें मराठी दर्शकों का चहेता बना दिया। उनकी सबसे अलग पहचान है मराठवाड़ा का लहजा — जिस बोली को ज़्यादातर फ़िल्में मज़ाक तक सीमित रखती थीं, मकरंद ने उसे अपने किरदारों की आवाज़ बना दिया।

2011 में उन्होंने मराठी फ़िल्म ‘डँबिस’ का निर्देशन किया और कई फ़िल्मों का निर्माण भी किया है।

हिंदी फ़िल्मों और टीवी में भी दिखे

मकरंद सिर्फ़ मराठी तक सीमित नहीं रहे। हिंदी में वह ‘वास्तव’, ‘यशवंत’, ‘जिस देश में गंगा रहता है’ और ‘माय फ़्रेंड गणेशा 3’ जैसी फ़िल्मों में दिखे। ‘यशवंत’ में ख़ुद नाना पाटेकर लीड रोल में थे। टीवी पर वह ‘CID’ में नज़र आए और ‘तू तू मैं मैं’ में कैमियो किया।

मराठी टीवी पर वह और भी बड़ा नाम हैं। ज़ी मराठी के शो ‘हप्ता बंद’ के दूसरे सीज़न के होस्ट रहे, कॉमेडी शो ‘फू बाई फू’ और सोनी मराठी के ‘महाराष्ट्राची हास्यजत्रा’ में जज रहे, और कलर्स मराठी पर ‘अस्सल पाहुणे इरसाल नमुने’ होस्ट किया। मराठी टीवी पर इन दिनों क्या चल रहा है, इसकी एक झलक हमारी ‘कोण होणार करोडपती’ रिपोर्ट में है।

नाना पाटेकर से रिश्ता: “फ़िल्मों में मुझे नाना लाए”

विकिपीडिया के मुताबिक़ मकरंद अनासपुरे फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी एंट्री का श्रेय नाना पाटेकर को देते हैं। दोनों मराठी रंगमंच से आए थे और दोनों की शैली में एक बात साझा थी — सीधी, बेलाग बात कहना।

यह रिश्ता परदे से बाहर तब और गहरा हुआ जब 2015 में महाराष्ट्र भयानक सूखे से गुज़र रहा था। नाना पाटेकर के करियर और उनके आख़िरी दिनों पर हमारी विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

नाम फ़ाउंडेशन क्या है और क्या करता है

नाम फ़ाउंडेशन की शुरुआत किसी संस्था के तौर पर नहीं हुई थी। 2015 में नाना और मकरंद ने निजी तौर पर उन किसान परिवारों की मदद शुरू की जिनके घर के किसी सदस्य ने आत्महत्या की थी। शुरुआत में नांदेड़, परभणी और हिंगोली ज़िलों के करीब 230 परिवारों तक मदद पहुँची — हर परिवार को ₹15,000 का चेक, कंबल, कपड़े और मेडिकल किट।

फिर दोनों ने तय किया कि कुछ परिवारों तक सीमित रहने के बजाय एक संस्था बनाई जाए। सितंबर 2015 में पुणे में नाम फ़ाउंडेशन रजिस्टर हुआ। विकिपीडिया के मुताबिक़ पहले ही दिन ₹80 लाख का दान आया और दो हफ़्तों में यह रक़म ₹6.5 करोड़ पार कर गई।

नाम फ़ाउंडेशनविवरण
संस्थापकनाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे
रजिस्ट्रेशनसितंबर 2015, पुणे
काम का इलाक़ामराठवाड़ा और विदर्भ के सूखा-प्रभावित इलाक़े
गोद लिए गांवधोंडलगाँव (वैजापुर, औरंगाबाद) और आमला (वर्धा)
दफ़्तरमुंबई, ठाणे, पुणे, औरंगाबाद, नागपुर
मुख्य कामशिक्षा, किसान विधवाओं की मदद, सामूहिक खेती, सिलाई क्लस्टर, नदी पुनर्जीवन, घर निर्माण

पैसों की मदद के अलावा फ़ाउंडेशन ने एक करोड़ पेड़ लगाने, किसानों को ट्रेनिंग देने और रोज़गार केंद्र खोलने जैसे लक्ष्य भी रखे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाना को श्रद्धांजलि देते हुए भी नाम फ़ाउंडेशन के ज़रिए गाँवों में किए गए उनके काम को ख़ास तौर पर याद किया।

अंतिम संस्कार में मकरंद ने क्या कहा

IANS के मुताबिक़ जब नाना का पार्थिव शरीर डोणजे फ़ार्महाउस पहुँचा, तो उनके क़रीबी लोगों में सबसे पहले पहुँचने वालों में मकरंद थे। IANS से उन्होंने कहा कि यह ख़बर दिल तोड़ने वाली है और इस नुक़सान से उबरने में सबको वक़्त लगेगा।

लेकिन उनकी बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। मकरंद ने कहा कि महाराष्ट्र को सूखे से निपटने में मदद करते रहना — और पहले से कहीं ज़्यादा करना — ही नाना को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी। यानी जिस काम को दोनों ने साथ शुरू किया था, मकरंद ने उसे ही नाना की विरासत बताया।

गल्फ़ न्यूज़ के मुताबिक़ अंतिम संस्कार में 1,000 से ज़्यादा लोग पहुँचे थे और कई लोगों के लिए नाना की विरासत अभिनय से आगे, किसानों और गाँवों के लिए किए गए उनके काम में थी — वही काम, जिसमें मकरंद उनके साथी रहे।

मकरंद अनासपुरे का परिवार

मकरंद की पत्नी शिल्पा अनासपुरे हैं। दोनों की मुलाक़ात साल 2000 में नाटक ‘जाऊ बाई जोरात’ के दौरान हुई थी और 30 नवंबर 2001 को पुणे में पारंपरिक तरीक़े से शादी हुई। शिल्पा कोंकण में गुहागर के पास वरवेली की हैं, लेकिन पली-बढ़ीं मुंबई में। शादी के बाद उन्होंने मकरंद के साथ ‘सुंबरान’ (2009), ‘गोष्ट छोटी डोंगराएवढी’ (2009) और ‘कापूस कोंड्याची गोष्ट’ (2014) जैसी फ़िल्मों में काम किया। दोनों के दो बच्चे हैं — बेटा इंद्रनील और बेटी इंद्रायणी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मकरंद अनासपुरे कौन हैं?

मराठी फ़िल्मों और रंगमंच के अभिनेता, निर्देशक और निर्माता, जो अपने मराठवाड़ी अंदाज़ और कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। वह नाना पाटेकर के साथ नाम फ़ाउंडेशन के सह-संस्थापक हैं।

मकरंद अनासपुरे की उम्र कितनी है?

उनका जन्म 22 जुलाई 1973 को हुआ था, यानी अक्टूबर 2026 में वह 53 साल के हैं।

मकरंद अनासपुरे का नाना पाटेकर से क्या रिश्ता था?

मकरंद फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी एंट्री का श्रेय नाना को देते हैं। 2015 में दोनों ने मिलकर सूखा-पीड़ित किसानों के लिए नाम फ़ाउंडेशन बनाया।

नाम फ़ाउंडेशन क्या है?

पुणे में सितंबर 2015 में रजिस्टर हुई संस्था, जो महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के सूखा-प्रभावित किसानों की मदद करती है — आर्थिक सहायता, शिक्षा, किसान विधवाओं की मदद, सामूहिक खेती और नदी पुनर्जीवन जैसे कामों के ज़रिए।

मकरंद अनासपुरे की मशहूर फ़िल्में कौन-सी हैं?

मराठी में ‘दे धक्का’, ‘गल्लीत गोंधळ दिल्लीत मुजरा’, ‘गाढवाचं लग्न’ और ‘साडे माडे तीन’; हिंदी में ‘वास्तव’ और ‘यशवंत’।

मकरंद अनासपुरे की पत्नी कौन हैं?

शिल्पा अनासपुरे। दोनों की शादी 30 नवंबर 2001 को पुणे में हुई थी।

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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