‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के एक हालिया एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने वह किया जो वह मंच से कम ही करते हैं — सार्वजनिक माफ़ी। वजह थी उनका पुश्तैनी गांव बाबू पट्टी, और वहाँ बच्चों के लिए बनने वाली वह लाइब्रेरी जो इमारत तैयार होने के बाद भी अब तक शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद से “अमिताभ बच्चन का पुश्तैनी गांव कौन सा है” इंटरनेट पर लगातार खोजा जा रहा है।
नीचे पूरी कहानी है — KBC में क्या हुआ, बाबू पट्टी कहाँ है, बच्चन परिवार का इस गांव से क्या रिश्ता है, और 2006 में खुली लाइब्रेरी का क्या हुआ।
KBC 18 में क्या हुआ
हॉट सीट पर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से जुड़े प्रतियोगी चंद्र प्रकाश तिवारी पहुँचे थे। बातचीत में जैसे ही बाबू पट्टी का नाम आया, अमिताभ ने बताया कि यह उनके पूर्वजों की जन्मभूमि है और उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन इसी गांव से थे। इस एपिसोड की रिपोर्ट्स 5 अक्टूबर से आनी शुरू हुईं।
फिर उन्होंने लाइब्रेरी की बात छेड़ी। IANS के मुताबिक़ यह विचार जया बच्चन का था — जब वह बाबू पट्टी गईं तो उन्होंने देखा कि गांव के बच्चों के पास पढ़ने के लिए कोई ठीक जगह नहीं है। इसके बाद दोनों ने वहाँ लाइब्रेरी बनाने की योजना बनाई। अमिताभ ने माना कि इमारत बन चुकी है, लेकिन कुछ अड़चनों के कारण उसमें ज़रूरी सामान नहीं लग पाया और वह चालू नहीं हो सकी।
ख़बरवाला24 की रिपोर्ट में दर्ज उनके शब्द थे: “हम बाबू पट्टी के लोगों से माफी मांगते हैं। हम आप सभी से केबीसी के मंच से कहना चाहते हैं कि बिल्कुल घबराइए मत, लाइब्रेरी जल्द ही खोल दी जाएगी।” उन्होंने कहा कि अब उसमें ज़रूरी सामान और किताबें रखी जा रही हैं ताकि बच्चे वहाँ बैठकर पढ़ सकें। लाइब्रेरी किस तारीख़ को खुलेगी, यह उन्होंने नहीं बताया।
अमिताभ बच्चन का पुश्तैनी गांव बाबू पट्टी कहाँ है — एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| गांव | बाबू पट्टी (अंग्रेज़ी में Babupatti / Babu Patti) |
| तहसील | रानीगंज |
| ज़िला | प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश |
| रिश्ता | हरिवंश राय बच्चन का जन्मस्थान, बच्चन परिवार का पुश्तैनी गांव |
| अमिताभ का जन्मस्थान | इलाहाबाद (अब प्रयागराज), 11 अक्टूबर 1942 |
| गांव में स्मारक | डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय (उद्घाटन 2006) |
हरिवंश राय बच्चन और बाबू पट्टी
विकिपीडिया के मुताबिक़ ‘मधुशाला’ के रचयिता हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 को बाबूपट्टी में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। परिवार का उपनाम श्रीवास्तव था। ‘बच्चन’ उनका कवि-नाम था, जिसका मतलब है बच्चे जैसा। जब बड़े बेटे का स्कूल में दाख़िला कराने की बारी आई, तो हरिवंश राय और तेजी बच्चन ने तय किया कि परिवार का उपनाम ‘बच्चन’ ही होगा, क्योंकि दोनों जाति व्यवस्था के ख़िलाफ़ थे। यानी अमिताभ के नाम में जो ‘बच्चन’ है, वह असल में उनके पिता की कविता से आया है, बाबू पट्टी के पुराने उपनाम से नहीं।
नाम की कहानी भी दिलचस्प है। विकिपीडिया के अनुसार माता-पिता पहले बेटे का नाम ‘इंक़लाब’ रखना चाहते थे, ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ के नारे से प्रेरित होकर। ‘अमिताभ’ नाम कवि सुमित्रानंदन पंत ने सुझाया था। हरिवंश राय 1941 से 1957 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाते रहे, इसलिए परिवार की ज़िंदगी इलाहाबाद में बीती और अमिताभ का जन्म भी वहीं हुआ।
इलाहाबाद से चुनाव
इस इलाक़े से अमिताभ का रिश्ता सिर्फ़ जन्म तक सीमित नहीं रहा। विकिपीडिया के मुताबिक़ 1984 में उन्होंने अभिनय से ब्रेक लेकर पारिवारिक मित्र राजीव गांधी के समर्थन में राजनीति में क़दम रखा और इलाहाबाद लोकसभा सीट से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा। उन्हें 68.2% वोट मिले — भारतीय चुनावों के सबसे बड़े अंतरों में से एक। 1987 तक वह राजनीति में रहे।
2006 की लाइब्रेरी का क्या हुआ
बाबू पट्टी में लाइब्रेरी की कहानी 2026 में शुरू नहीं हुई। ITDC इंडिया और IANS के मुताबिक़ 2006 में जया बच्चन ने गांव में डॉ. हरिवंश राय बच्चन स्मारक पुस्तकालय का उद्घाटन किया था। ख़बरवाला24 और TV9 मराठी के अनुसार उस मौक़े पर पूर्व सांसद अमर सिंह भी मौजूद थे।
उसके बाद क्या हुआ, इस पर रिपोर्ट्स एक जैसी बात कहती हैं: शुरुआती सालों के बाद ठीक से देखरेख नहीं हुई, कुछ स्थानीय अड़चनें आईं, और लाइब्रेरी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं चल सकी। TV9 मराठी के मुताबिक़ समय के साथ इमारत भी जर्जर हो गई। IANS ने लिखा है कि पिछले कई सालों से रिपोर्ट्स में लाइब्रेरी की हालत पर सवाल उठते रहे हैं। अब ख़बरवाला24 के मुताबिक़ बच्चन परिवार की कोशिश से इसे नए सिरे से शुरू करने का काम आख़िरी चरण में है।
यानी जो माफ़ी KBC के मंच से मांगी गई, वह एक ऐसे वादे के लिए थी जिसकी शुरुआत करीब 20 साल पहले हुई थी।
तीन दिन बाद 84 के होंगे अमिताभ
यह सब ऐसे समय हो रहा है जब अमिताभ 11 अक्टूबर 2026 को 84 साल के होने वाले हैं, और इस उम्र में भी KBC का 18वां सीज़न होस्ट कर रहे हैं। KBC 18 की शुरुआत पर हमारी यह रिपोर्ट और उनकी 24 घंटे की KBC शिफ़्ट वाली कहानी भी पढ़ें। मराठी में इसी फ़ॉर्मेट की वापसी — माधुरी दीक्षित का ‘कोण होणार करोडपती’ — 12 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।
अमिताभ का पूर्वांचल से रिश्ता परदे पर भी दिखा है — उन्होंने तीन भोजपुरी फ़िल्मों में काम किया और फ़ीस नहीं ली। बॉलीवुड सितारों की भोजपुरी फ़िल्मों की पूरी सूची यहाँ देखें। बाक़ी ख़बरों के लिए हमारा बॉलीवुड सेक्शन देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अमिताभ बच्चन का पुश्तैनी गांव कौन सा है?
बाबू पट्टी (बाबूपट्टी), जो उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले की रानीगंज तहसील में है।
अमिताभ बच्चन का जन्म कहाँ हुआ था?
11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में। बाबू पट्टी उनके पिता हरिवंश राय बच्चन का जन्मस्थान है।
अमिताभ बच्चन ने KBC में माफ़ी क्यों मांगी?
बाबू पट्टी में बच्चों के लिए बनी लाइब्रेरी इमारत तैयार होने के बावजूद अब तक चालू नहीं हो सकी है। उन्होंने इस देरी के लिए गांव वालों से माफ़ी मांगी और जल्द शुरू करने का वादा किया।
बाबू पट्टी की लाइब्रेरी कब खुलेगी?
अमिताभ ने “जल्द” कहा, लेकिन कोई तारीख़ नहीं बताई। उनके मुताबिक़ इमारत तैयार है और अब किताबें व ज़रूरी सामान रखे जा रहे हैं।
अमिताभ बच्चन का असली उपनाम क्या है?
परिवार का मूल उपनाम श्रीवास्तव था। ‘बच्चन’ उनके पिता का कवि-नाम था, जिसे बाद में परिवार ने क़ानूनी उपनाम बना लिया।
हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब हुआ था?
27 नवंबर 1907 को, बाबूपट्टी में। उनका निधन 18 जनवरी 2003 को हुआ।












