सीधा जवाब: दिग्गज अभिनेता देव आनंद के इकलौते बेटे, अभिनेता-निर्देशक सुनील आनंद का 26 जुलाई 2026 को लंदन में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे।
परिवार के मुताबिक़ वे अमेरिका से भारत लौटते समय ब्रिटेन में बीमार पड़े थे। जिस अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली, वहीं 2011 में उनके पिता देव आनंद का भी निधन हुआ था।
हिंदी सिनेमा के एक ऐतिहासिक परिवार से जुड़ी दुखद ख़बर सामने आई है। नवकेतन फ़िल्म्स की विरासत सँभालने वाले सुनील आनंद अब नहीं रहे। उनके निधन की जानकारी परिवार की ओर से दी गई।
कैसे हुआ निधन?
परिवार की ओर से जारी बयान में उनकी भतीजी गीना नारंग ने बताया कि सुनील आनंद अमेरिका से भारत आ रहे थे और इस यात्रा के दौरान ब्रिटेन में उन्हें दिल का दौरा पड़ा।
उन्हें तुरंत लंदन के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जाँच के बाद डॉक्टरों ने स्टेंट डालने की प्रक्रिया की योजना बनाई, लेकिन उससे पहले ही उन्हें दूसरा दिल का दौरा पड़ गया। मेडिकल टीम की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
एक दुखद संयोग यह भी रहा कि जिस लंदन के अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली, वहीं दिसंबर 2011 में उनके पिता देव आनंद का भी निधन हुआ था।
कौन थे सुनील आनंद?
सुनील आनंद का जन्म 30 जून 1956 को स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख़ में हुआ था। वे हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री कल्पना कार्तिक की इकलौती संतान थे।
देव आनंद का नाम भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने कलाकारों में आता है जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्माण और निर्देशन में भी लंबी पारी खेली। उनकी बनाई कंपनी नवकेतन फ़िल्म्स ने गाइड, ज्वेल थीफ़ और हरे रामा हरे कृष्णा जैसी फ़िल्में दीं। बाद के वर्षों में इसी बैनर की ज़िम्मेदारी सुनील आनंद ने सँभाली।
फ़िल्मी करियर: पर्दे से लेकर निर्देशन तक
सुनील आनंद ने 1984 में फ़िल्म ‘आनंद और आनंद’ से अभिनय की शुरुआत की थी। ख़ास बात यह थी कि इस फ़िल्म के निर्देशक उनके पिता देव आनंद ही थे और दोनों ने साथ काम किया।
| फ़िल्म | साल | भूमिका |
|---|---|---|
| आनंद और आनंद | 1984 | अभिनय (डेब्यू) |
| कार थीफ़ | 1986 | अभिनय |
| मैं तेरे लिए | 1988 | अभिनय |
| मास्टर | 2001 | अभिनय और निर्देशन |
साल 2001 में आई ‘मास्टर’ उनके करियर का अहम मोड़ थी। यह एक मार्शल आर्ट्स फ़िल्म थी और इसी से उन्होंने निर्देशन में क़दम रखा। यानी उन्होंने सिर्फ़ पिता की विरासत नहीं सँभाली, बल्कि अपनी अलग रचनात्मक पहचान बनाने की कोशिश भी की।
बाद के वर्षों में उनका रुझान अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स की तरफ़ बढ़ा। 2014 में उन्होंने वागाटोर मिक्सर नाम के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था, जिसमें वे अभिनेता और निर्देशक — दोनों भूमिकाओं में थे।
एक विरासत जो पर्दे से बड़ी थी
सुनील आनंद का करियर उनके पिता जितना बड़ा नहीं रहा, और यह बात इंडस्ट्री में हमेशा चर्चा में रही। लेकिन उनकी असली भूमिका कैमरे के सामने से ज़्यादा उसके पीछे रही — नवकेतन फ़िल्म्स को सँभालना, पुराने प्रोजेक्ट्स की देखरेख करना और परिवार की सिनेमाई विरासत को सुरक्षित रखना।
भारतीय सिनेमा में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ किसी दिग्गज कलाकार की अगली पीढ़ी पर तुलना का लगातार दबाव रहता है। सुनील आनंद का सफ़र भी इसी श्रेणी में देखा जाता रहा, लेकिन नवकेतन जैसे बैनर को दशकों तक ज़िंदा रखना अपने आप में एक बड़ी ज़िम्मेदारी थी।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सुनील आनंद कौन थे?
सुनील आनंद एक अभिनेता और निर्देशक थे और दिग्गज अभिनेता देव आनंद तथा अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के इकलौते बेटे थे। वे नवकेतन फ़िल्म्स का कामकाज भी सँभालते थे।
सुनील आनंद का निधन कब और कहाँ हुआ?
उनका निधन 26 जुलाई 2026 को लंदन में हुआ। दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उनकी उम्र कितनी थी?
निधन के समय वे 70 वर्ष के थे। उनका जन्म 30 जून 1956 को स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख़ में हुआ था।
सुनील आनंद ने किन फ़िल्मों में काम किया?
उन्होंने ‘आनंद और आनंद’ (1984), ‘कार थीफ़’ (1986), ‘मैं तेरे लिए’ (1988) और ‘मास्टर’ (2001) में काम किया। ‘मास्टर’ का निर्देशन भी उन्होंने ही किया था।
क्या उनका देव आनंद के निधन से कोई संयोग जुड़ा है?
हाँ, जिस लंदन के अस्पताल में सुनील आनंद का निधन हुआ, वहीं 2011 में उनके पिता देव आनंद ने भी अंतिम साँस ली थी।
स्रोत: India Blooms · Wikipedia












