सीधा जवाब: पंकज त्रिपाठी का जन्म 5 सितंबर 1976 को बिहार के गोपालगंज ज़िले के बेलसंड गाँव में हुआ था। किसान और पुजारी के बेटे, जो पटना के होटल मौर्या में क़रीब दो साल रसोइए का काम कर चुके हैं — और आज हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
उनके नाम दो नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड हैं, और ‘मिर्ज़ापुर’ का कालीन भैया उनका सबसे बड़ा किरदार।
5 सितंबर 2026 को पंकज त्रिपाठी 50 साल के हो गए — और संयोग देखिए, ठीक एक दिन पहले, 4 सितंबर को, उनके करियर की सबसे बड़ी थिएटर रिलीज़ ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ सिनेमाघरों में लगी। जिस आदमी को पहला ब्रेक मिलने में मुंबई पहुँचने के बाद आठ साल लगे, उसके नाम पर आज पहले ही दिन देश भर में साढ़े ग्यारह हज़ार शो चले।
यह पेज उन्हीं पचास सालों का हिसाब है — गाँव से गोपालगंज, गोपालगंज से पटना, पटना से दिल्ली और फिर मुंबई तक।
पंकज त्रिपाठी कौन हैं — एक नज़र में
| ब्यौरा | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | पंकज त्रिपाठी (जन्म के समय पंकज तिवारी) |
| जन्म | 5 सितंबर 1976 |
| जन्मस्थान | बेलसंड गाँव, गोपालगंज ज़िला, बिहार |
| पिता | पंडित बनारस तिवारी — किसान और पुजारी |
| माता | हेमवंती तिवारी |
| पढ़ाई | होटल मैनेजमेंट (हाजीपुर); नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा, दिल्ली — 2004 |
| पत्नी | मृदुला (शादी: 15 जनवरी 2004) |
| बेटी | आशी त्रिपाठी (जन्म 2006) |
| पहली फ़िल्म | ‘चिगुरिदा कनसु’ (2003, कन्नड़) |
| ब्रेकआउट | सुल्तान — ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ (2012) |
| सबसे बड़ा किरदार | अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ़ ‘कालीन भैया’ — ‘मिर्ज़ापुर’ (2018 से) |
| नेशनल अवॉर्ड | 2 — ‘न्यूटन’ (स्पेशल मेंशन) और ‘मिमी’ (बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर) |
नोट: कुछ स्रोत उनका जन्म वर्ष 1975 भी बताते हैं। विकिपीडिया समेत ज़्यादातर जगह 1976 दर्ज है।
गाँव, खेत और वो नाटक जिनमें वो लड़की बनते थे
पंकज चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। पिता पंडित बनारस तिवारी खेती करते थे और गाँव में पुरोहिती भी। ग्यारहवीं तक पंकज ख़ुद भी पिता के साथ खेतों में काम करते रहे।
अभिनय की पहली सीढ़ी स्कूल या थिएटर स्कूल नहीं, गाँव के त्योहार थे। बेलसंड में होने वाले नाटकों में पंकज हिस्सा लेते थे — और शुरुआती दिनों में उन्हें स्त्री-पात्र निभाने पड़ते थे, क्योंकि गाँव के नाटकों में महिला कलाकार होती ही नहीं थीं। यही वह जगह थी जहाँ पहली बार तालियाँ सुनने की आदत पड़ी।
एक और छोटी-सी बात, जो उनके नाम के साथ हमेशा जुड़ी रहती है: वह पैदा हुए थे पंकज तिवारी के नाम से। स्कूल के दिनों में ही, नौवीं कक्षा के आसपास, उन्होंने सरनेम बदलकर त्रिपाठी कर लिया।
होटल मौर्या का रसोइया
स्कूल के बाद पंकज ने पटना का रुख़ किया और होटल मैनेजमेंट पढ़ा। पढ़ाई के बाद उन्होंने पटना के होटल मौर्या में क़रीब दो साल रसोइए के तौर पर काम किया।
यह उनकी कहानी का सबसे ज़्यादा दोहराया जाने वाला हिस्सा है, और इसकी वजह भी है — जिस आदमी को आज दर्शक ‘कालीन भैया’ के ठंडे, नपे-तुले ठहराव के लिए जानते हैं, उसने अपनी नौकरी की शुरुआत होटल की रसोई में की थी। पटना में ही थिएटर से उनका असली जुड़ाव हुआ, और वहीं से रास्ता दिल्ली की तरफ़ मुड़ा।
नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा, और 2004 का साल
पंकज ने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) से 2004 में ग्रेजुएशन किया। 2004 उनके जीवन का सबसे भरा हुआ साल रहा — इसी साल जनवरी में उन्होंने मृदुला से शादी की, जिनसे उनकी मुलाक़ात 1993 में हुई थी, और इसी साल वह काम की तलाश में मुंबई आ गए।
मुंबई के शुरुआती साल आसान नहीं थे। कैमरे के सामने उनका पहला काम 2003 की कन्नड़ फ़िल्म ‘चिगुरिदा कनसु’ था, हिंदी में पहली बार वह 2004 के एक टाटा टी विज्ञापन में दिखे, और उसी साल फ़िल्म ‘रन’ में बिना क्रेडिट के एक छोटा-सा रोल किया। इसके बाद ‘ओंकारा’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फ़िल्मों में छोटे किरदार मिलते रहे — दिखते रहे, पहचाने नहीं गए।
‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ — आठ साल बाद मिला दरवाज़ा
2012 में अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ आई और पंकज त्रिपाठी का सुल्तान वह किरदार बना जिसके बाद कास्टिंग डायरेक्टरों ने उनका नाम याद रखना शुरू किया। मुंबई पहुँचने के आठ साल बाद उन्हें वह पहचान मिली जिसकी तलाश में वह आए थे।
इसके बाद का दशक लगभग रुका नहीं:
- बरेली की बर्फ़ी (2017)
- न्यूटन (2017) — नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, स्पेशल मेंशन
- स्त्री (2018) — स्क्रीन अवॉर्ड, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (2019)
- काला (2018) — तमिल डेब्यू
- मिर्ज़ापुर (2018 से) — कालीन भैया
- क्रिमिनल जस्टिस (2019–2022) — माधव मिश्रा
- लूडो (2020) — IIFA बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर
- एक्सट्रैक्शन (2020) — हॉलीवुड डेब्यू
- मिमी (2021) — नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर
- 83 (2021)
- OMG 2 (2023)
- मैं अटल हूँ (2024) — अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका
- स्त्री 2 (2024)
‘कालीन भैया’ — वो किरदार जिसने सब बदल दिया
2018 में ‘मिर्ज़ापुर’ आई और अखंडानंद त्रिपाठी उर्फ़ कालीन भैया सीरीज़ का चेहरा बन गए। किरदार की ख़ासियत शोर नहीं, ठहराव है — धीमी आवाज़, नपे हुए वाक्य, और उसके पीछे छिपी हुई हिंसा। यही वजह है कि सीरीज़ के डायलॉग सालों तक मीम बनकर घूमते रहे।
आठ साल बाद यह किरदार बड़े परदे पर पहुँचा है। ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ 4 सितंबर 2026 को थिएटर में रिलीज़ हुई, और Sacnilk के आँकड़ों के मुताबिक़ पहले दिन इसने भारत में ₹25.15 करोड़ नेट (₹30.18 करोड़ ग्रॉस) की कमाई की, 11,135 शो और 42.7% ऑक्यूपेंसी के साथ। फ़िल्म की पूरी डिटेल — कास्ट, रनटाइम और सर्टिफ़िकेट — हमने इस पेज पर दी है।
अवॉर्ड और सम्मान
| अवॉर्ड | फ़िल्म | साल |
|---|---|---|
| नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड — स्पेशल मेंशन | न्यूटन | 2017 |
| स्क्रीन अवॉर्ड — बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर | स्त्री | 2019 |
| IIFA — बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर | लूडो | 2020 |
| नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड — बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर | मिमी | 2021 |
| फ़िल्मफ़ेयर — बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर | मिमी | 2022 |
अभिनय से बाहर भी उनके नाम कुछ काम दर्ज हैं — 2023 में उन्होंने अपने पिता की स्मृति में बेलसंड गाँव में एक लाइब्रेरी खुलवाई, नवंबर 2023 में NPCI ने उन्हें ‘UPI सेफ़्टी एंबेसडर’ बनाया, और 2024 में वह भारत रंग महोत्सव के ब्रांड एंबेसडर रहे।
आगे क्या
‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ के अलावा उनकी फ़िल्म ‘ओह माय डॉग’ भी लाइन में रही है, जिसकी रिलीज़ डेट पहले आगे खिसकी थी — वह पूरा मामला यहाँ। सितंबर 2026 में और कौन-सी फ़िल्में थिएटर में लग रही हैं, इसकी पूरी लिस्ट यहाँ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंकज त्रिपाठी की उम्र कितनी है?
5 सितंबर 2026 को वह 50 साल के हुए। उनका जन्म 5 सितंबर 1976 को हुआ था।
पंकज त्रिपाठी कहाँ के रहने वाले हैं?
बिहार के गोपालगंज ज़िले के बेलसंड गाँव के। उनके पिता किसान और पुजारी थे।
पंकज त्रिपाठी ने होटल में काम किया था?
हाँ। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने पटना के होटल मौर्या में क़रीब दो साल रसोइए के तौर पर काम किया था।
पंकज त्रिपाठी की पहली फ़िल्म कौन-सी थी?
कैमरे के सामने उनका पहला काम 2003 की कन्नड़ फ़िल्म ‘चिगुरिदा कनसु’ था। हिंदी में पहचान 2012 की ‘गैंग्स ऑफ़ वासेपुर’ से मिली।
पंकज त्रिपाठी को कितने नेशनल अवॉर्ड मिले हैं?
दो — ‘न्यूटन’ (2017) के लिए स्पेशल मेंशन और ‘मिमी’ (2021) के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर।
पंकज त्रिपाठी की पत्नी और बेटी कौन हैं?
पत्नी का नाम मृदुला है, शादी 15 जनवरी 2004 को हुई। बेटी आशी त्रिपाठी का जन्म 2006 में हुआ।
‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ ने पहले दिन कितनी कमाई की?
Sacnilk के मुताबिक़ भारत में ₹25.15 करोड़ नेट (₹30.18 करोड़ ग्रॉस), 11,135 शो के साथ।
स्रोत: विकिपीडिया, NewsX और Sacnilk। बॉलीवुड की और ख़बरें यहाँ।












