सीधा जवाब: सिनेमा में 67 साल पूरे होने पर कमल हासन ने X पर लिखा — “इन 67 सालों में से मैं सिर्फ़ क़रीब 20 साल ही अपनी असली सीख के तौर पर बचा पाता हूँ।” उन्होंने ख़ुद को “सिनेमा का शायद सबसे बुज़ुर्ग Gen Z” बताया।
कमल हासन ने छह साल की उम्र में ‘कलत्तूर कण्णम्मा’ (1960) से बतौर बाल कलाकार शुरुआत की थी और अब तक छह भाषाओं में 230 से ज़्यादा फ़िल्में कर चुके हैं।
67 साल पूरे करने पर ज़्यादातर कलाकार गिनती बताते हैं — फ़िल्में, अवॉर्ड, रिकॉर्ड। कमल हासन ने उल्टा किया। उन्होंने घटाकर बताया।
13 अगस्त 2026 को सिनेमा में अपने 67 साल पूरे होने पर उन्होंने X पर लिखा — “मुझे 67 साल के सिनेमा पर शुभकामनाएँ देने वाले सभी लोगों का शुक्रिया। इन 67 में से मैं सिर्फ़ क़रीब 20 साल ही अपनी असली सीख के तौर पर बचा पाता हूँ।”
और फिर वह लाइन आई जो पूरे दिन सोशल मीडिया पर घूमती रही — “मैं शायद सिनेमा का सबसे बुज़ुर्ग Gen Z हूँ।”
“आधे से ज़्यादा इतिहास” का मतलब क्या है
अपनी बात में कमल हासन ने एक और दिलचस्प बात कही — उनके 67 साल पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री के इतिहास के आधे से भी ज़्यादा हिस्से को कवर करते हैं।
यह अतिशयोक्ति नहीं है। सिनेमा की उम्र ही सवा सौ साल के आसपास है, और उसमें से 67 साल एक ही चेहरे का लगातार परदे पर बने रहना — यह ऐसा आँकड़ा है जिसे दोहराना अब लगभग नामुमकिन है। बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत करने वाले ज़्यादातर सितारे या तो जवानी में ग़ायब हो जाते हैं, या एक ही तरह के किरदारों में क़ैद हो जाते हैं।
कमल हासन के साथ इसका उल्टा हुआ। उनकी पहचान ही यह बनी कि वे हर दस साल में ख़ुद को तोड़कर दोबारा बनाते हैं — मेकअप, भाषा, शैली, विषय, सब बदलते हुए।
छह साल की उम्र से शुरू हुई कहानी
कमल हासन ने छह साल की उम्र में ‘कलत्तूर कण्णम्मा’ (1960) से शुरुआत की थी और इसी फ़िल्म के लिए उन्हें राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक मिला था। 1962 में ‘कण्णुम करलुम’ से उन्होंने मलयालम सिनेमा में क़दम रखा।
वहाँ से आगे का सफ़र तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी, कन्नड़ और बांग्ला — छह भाषाओं और 230 से ज़्यादा फ़िल्मों तक जाता है। इस दौरान उन्होंने अभिनय के अलावा लेखन, निर्देशन, निर्माण, गायन और कोरियोग्राफ़ी तक में हाथ आज़माया।
एक नज़र में कमल हासन
| पड़ाव | ब्योरा |
|---|---|
| पहली फ़िल्म | ‘कलत्तूर कण्णम्मा’ (1960), बतौर बाल कलाकार |
| पहला सम्मान | राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक |
| मलयालम डेब्यू | ‘कण्णुम करलुम’ (1962) |
| भाषाएँ | तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी, कन्नड़, बांग्ला |
| कुल फ़िल्में | 230 से ज़्यादा |
| मील का पत्थर | सिनेमा में 67 साल (अगस्त 2026) |
‘Gen Z’ कहने के पीछे की बात
यह जुमला मज़ाक़ जैसा लगता है, लेकिन कमल हासन ने इसे जिस संदर्भ में कहा वह गंभीर है। उनका इशारा सीखते रहने की ज़िद पर था — कि इंडस्ट्री जिस रफ़्तार से बदल रही है, उसमें बने रहने के लिए उम्र नहीं, नई चीज़ें अपनाने की तैयारी मायने रखती है।
“सिर्फ़ 20 साल असली सीख” वाली बात भी इसी का हिस्सा है। वे यह नहीं कह रहे कि बाक़ी 47 साल बेकार गए — वे यह कह रहे हैं कि करियर की लंबाई और सीखने की गहराई एक चीज़ नहीं होती। किसी युवा एक्टर के लिए यह शायद इस साल की सबसे काम की बात है।
यह बात ऐसे वक़्त पर आई है जब दक्षिण भारतीय सिनेमा अपने सबसे बड़े दौर से गुज़र रहा है — थलपति विजय की आख़िरी फ़िल्म ‘Jana Nayagan’ हो, यश की ‘Toxic’ हो या महेश बाबू की ‘Varanasi’। इसी शोर के बीच इंडस्ट्री का सबसे पुराना चेहरा यह याद दिला रहा है कि टिके रहना और सीखते रहना — दोनों अलग-अलग काम हैं।
साउथ सिनेमा की और ख़बरों के लिए देखें तमिल सेक्शन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कमल हासन ने ख़ुद को ‘सबसे बुज़ुर्ग Gen Z’ क्यों कहा?
सिनेमा में 67 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा कि वे आज भी सीखने और बदलते सिनेमा के साथ चलने की कोशिश करते हैं — इसी वजह से उन्होंने ख़ुद को “सिनेमा का शायद सबसे बुज़ुर्ग Gen Z” बताया।
कमल हासन ने अपना करियर कब शुरू किया था?
छह साल की उम्र में, 1960 की फ़िल्म ‘कलत्तूर कण्णम्मा’ से बतौर बाल कलाकार। इसी फ़िल्म के लिए उन्हें राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक मिला था।
कमल हासन ने कितनी फ़िल्में की हैं?
तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी, कन्नड़ और बांग्ला मिलाकर 230 से ज़्यादा फ़िल्में।
“सिर्फ़ 20 साल सीखा” कहने का मतलब क्या था?
उनका कहना था कि 67 साल के करियर में से वे सिर्फ़ क़रीब 20 साल को अपनी असली सीख मानते हैं — यानी करियर की लंबाई और सीखने की गहराई अलग-अलग चीज़ें हैं।
कमल हासन का मलयालम डेब्यू कौन-सी फ़िल्म थी?
1962 में आई ‘कण्णुम करलुम’।












