“जब मैं आया था, तब ये टॉपिक ही नहीं था” — नेपोटिज्म की बहस का ठीकरा अरशद वारसी ने कंगना पर फोड़ा

By Riya Mehta

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नेपोटिज्म की बहस का ठीकरा अरशद वारसी ने कंगना पर फोड़ा — "जब मैं आया था, तब ये टॉपिक ही नहीं था"

सीधी बात: अरशद वारसी ने कहा है कि जब वो इंडस्ट्री में आए थे तब नेपोटिज्म कोई टॉपिक ही नहीं था — “इसकी शुरुआत कंगना से हुई।”

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें स्टार किड्स से कोई शिकायत नहीं है, बल्कि उनसे जुड़ी हद से ज़्यादा उम्मीदें ख़ुद उन बच्चों के साथ नाइंसाफ़ी हैं।

नेपोटिज्म पर बॉलीवुड में बहस को नौ साल हो चुके हैं और अब तक की सबसे दिलचस्प बात ये है कि इस पर सबसे साफ़ बोलने वाले लोग अक्सर वही होते हैं जिनका इंडस्ट्री में कोई नहीं था। अरशद वारसी उसी कैटेगरी में आते हैं — और उन्होंने इस बहस की जड़ पर जो कहा है, वो अब चर्चा में है।

अरशद वारसी नेपोटिज्म पर: “मुझे कोई दिक़्क़त नहीं”

आजतक की 29 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘Filmyzzaan’ को दिए एक इंटरव्यू में अरशद वारसी से नेपोटिज्म पर सवाल पूछा गया। उनका जवाब था:

“जब मैं फिल्मों में आया था, तब ये टॉपिक नहीं था। इसकी शुरुआत कंगना से हुई।”

यानी अरशद के हिसाब से ये शब्द इंडस्ट्री की रोज़मर्रा की बातचीत में था ही नहीं, जब तक कंगना रनौत ने इसे सामने नहीं रखा।

लेकिन अरशद की बात यहीं ख़त्म नहीं होती, और यही हिस्सा ज़्यादा दिलचस्प है। उन्होंने साफ़ कहा कि उन्हें नेपोटिज्म से कोई निजी शिकायत नहीं है — उन्हें स्टार किड्स पसंद हैं, और आख़िर में टिकता वही है जिसमें टैलेंट हो।

“स्टार किड्स के साथ भी नाइंसाफ़ी होती है”

अरशद ने माना कि स्टार किड्स को इंडस्ट्री के भीतर बेहतर कनेक्शन मिलते हैं और उनकी एंट्री आसान होती है। लेकिन उनका तर्क ये है कि एंट्री और टिकाव दो अलग चीज़ें हैं — और टिकने की लड़ाई स्टार किड के लिए भी उतनी ही मुश्किल है जितनी किसी बाहरी के लिए।

उन्होंने इसे नाइंसाफ़ी कहा कि स्टार किड्स से हद से ज़्यादा उम्मीदें बांध ली जाती हैं। लोग मान लेते हैं कि एक कामयाब एक्टर का बच्चा अपने-आप उसकी प्रतिभा लेकर पैदा हुआ होगा।

ये बात उन्होंने अपने बेटे ज़ीक के हवाले से भी कही — उन्हें यही चिंता है कि लोग उनके बेटे को उनकी छाया मानकर देखेंगे, न कि एक अलग इंसान के तौर पर। अरशद और मारिया गोरेटी की शादी फ़रवरी 1996 में हुई थी; उनके दो बच्चे हैं — ज़ीक (जन्म 2005) और ज़ेने ज़ो (जन्म 2007)।

ये बयान अरशद के मुँह से क्यों मायने रखता है

नेपोटिज्म पर बोलने वाले ज़्यादातर लोग या तो फ़िल्मी परिवार से हैं, या पूरी तरह बाहरी। अरशद दूसरी कैटेगरी का सबसे कड़ा उदाहरण हैं।

19 अप्रैल 1968 को जन्मे अरशद 14 साल की उम्र में अनाथ हो गए थे। उनके पिता उर्दू शायर और संगीतकार थे — फ़िल्मी बैकग्राउंड कोई नहीं। 17 साल की उम्र में उन्होंने घर-घर जाकर कॉस्मेटिक्स बेचे, फिर एक फ़ोटो लैब में काम किया।

डांस से रास्ता खुला। उन्होंने अकबर सामी के डांस ग्रुप में जगह बनाई, 1987 में ‘ठिकाना’ और ‘काश’ जैसी फ़िल्मों में कोरियोग्राफ़ी की, 1991 में एक राष्ट्रीय डांस प्रतियोगिता जीती और 1992 में लंदन में हुई वर्ल्ड डांस चैंपियनशिप में चौथे नंबर पर रहे।

एक्टिंग डेब्यू 1996 में ‘तेरे मेरे सपने’ से हुआ, जो कामयाब रही। लेकिन असली पहचान 2003 में मिली — ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ का सर्किट। उस किरदार ने उन्हें ज़ी सिने अवॉर्ड (बेस्ट एक्टर, कॉमिक रोल) दिलाया, और 2006 की ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ के लिए 2007 में फ़िल्मफ़ेयर।

पड़ावसालब्यौरा
जन्म19 अप्रैल 1968पिता उर्दू शायर और संगीतकार; कोई फ़िल्मी परिवार नहीं
संघर्ष1985 के आसपास17 की उम्र में घर-घर कॉस्मेटिक्स बेचे, फिर फ़ोटो लैब में काम
कोरियोग्राफ़ी1987‘ठिकाना’ और ‘काश’ में काम
डांस1991-92भारतीय डांस प्रतियोगिता जीती; लंदन वर्ल्ड चैंपियनशिप में चौथा स्थान
एक्टिंग डेब्यू1996‘तेरे मेरे सपने’ — बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाब
ब्रेकथ्रू2003‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ में सर्किट
फ़िल्मफ़ेयर2007‘लगे रहो मुन्ना भाई’ के लिए बेस्ट कॉमिक परफ़ॉर्मेंस

यानी जब अरशद कहते हैं कि “टैलेंट ही टिकाता है”, तो वो किसी थ्योरी से नहीं, अपने रास्ते से बोल रहे हैं। और जब वही आदमी कहता है कि स्टार किड्स से उसे कोई दिक़्क़त नहीं, तो बहस का एक पूरा सिरा कमज़ोर पड़ जाता है।

बहस कहाँ से शुरू हुई थी

नेपोटिज्म शब्द बॉलीवुड की आम बातचीत में कंगना रनौत के ज़रिए ही पहुँचा, और उसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद ये बहस अपने चरम पर पहुँची। तब से हर कुछ महीने में कोई न कोई सितारा इस पर बयान देता है — कभी बचाव में, कभी हमले में।

कंगना ख़ुद इस बहस से कभी दूर नहीं रहीं। पिछले कुछ हफ़्तों में ही वो कई बार सुर्ख़ियों में रहीं — जैसे रक्षाबंधन के एक विज्ञापन पर उनके तंज़ के बाद कृति सैनन का पलटवार, बाबा रामदेव के बयान पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया, और ऋतिक रोशन को लेकर दिया गया बयान

अरशद के इस बयान पर कंगना की तरफ़ से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। उनका रिकॉर्ड देखते हुए, ख़ामोशी लंबी चलने की उम्मीद कम ही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अरशद वारसी ने कंगना रनौत के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि जब वो इंडस्ट्री में आए थे तब नेपोटिज्म कोई टॉपिक नहीं था और “इसकी शुरुआत कंगना से हुई।” ये उन्होंने आरोप के तौर पर नहीं, बहस की शुरुआत बताते हुए कहा।

क्या अरशद वारसी नेपोटिज्म के ख़िलाफ़ हैं?

नहीं। उन्होंने साफ़ कहा कि उन्हें इससे कोई दिक़्क़त नहीं है, उन्हें स्टार किड्स पसंद हैं, और लंबे समय में टैलेंट ही तय करता है कि कौन टिकेगा।

स्टार किड्स को लेकर उनका तर्क क्या है?

कि उन्हें एंट्री आसान मिलती है, लेकिन टिकने का संघर्ष उतना ही मुश्किल होता है — और उनसे बांधी गई हद से ज़्यादा उम्मीदें ख़ुद उनके साथ नाइंसाफ़ी हैं।

क्या अरशद वारसी फ़िल्मी परिवार से हैं?

नहीं। उनके पिता उर्दू शायर और संगीतकार थे। 14 की उम्र में अनाथ होने के बाद उन्होंने कॉस्मेटिक्स सेल्समैन और फ़ोटो लैब में काम किया, फिर डांस और कोरियोग्राफ़ी के रास्ते फ़िल्मों तक पहुँचे।

अरशद वारसी के बच्चे कौन हैं?

अरशद और मारिया गोरेटी के दो बच्चे हैं — बेटा ज़ीक (2005) और बेटी ज़ेने ज़ो (2007)।

नेपोटिज्म की बहस बॉलीवुड में कब सबसे तेज़ हुई?

2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद, जब इंडस्ट्री में बाहरी कलाकारों के मौक़ों को लेकर सवाल सबसे मुखर तरीक़े से उठे।

बॉलीवुड की और ख़बरों के लिए देखिए हमारा बॉलीवुड सेक्शन

स्रोत: आजतक, Wikipedia

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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