“शादी से पहले रीना रॉय की एक भी फ़िल्म नहीं देखी थी” — 43 साल बाद बोले मोहसिन ख़ान

By Riya Mehta

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शादी से पहले रीना रॉय की एक भी फिल्म नहीं देखी थी — 43 साल बाद बोले मोहसिन खान

सीधा जवाब: पाकिस्तानी क्रिकेटर और बाद में अभिनेता बने मोहसिन ख़ान ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा कि उन्होंने रीना रॉय से शादी उनकी ख़ूबसूरती या शोहरत देखकर नहीं की थी — “मैंने शादी से पहले रीना रॉय की कोई फ़िल्म नहीं देखी थी।” दोनों की पहली मुलाक़ात लंदन में हुई थी, शादी 1983 में हुई और 90 के दशक की शुरुआत में तलाक़ हो गया।

1983 में जब एक पाकिस्तानी क्रिकेटर ने भारत की एक टॉप हीरोइन से शादी की, तो यह अपनी तरह का पहला मामला था। 43 साल बाद वही क्रिकेटर बीबीसी से कह रहे हैं कि जिस औरत से उन्होंने शादी की, उसकी एक भी फ़िल्म उन्होंने शादी से पहले नहीं देखी थी — और यह बात उन्हें ख़ुद पता है कि मानने में मुश्किल है।

लंदन की वो पहली मुलाक़ात

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की रिपोर्ट के मुताबिक़ मोहसिन ख़ान और रीना रॉय पहली बार लंदन में मिले थे। उस दौर में मोहसिन ख़ान इंग्लैंड में लीग क्रिकेट खेल रहे थे और रीना रॉय अपनी बहन के साथ वहाँ आई हुई थीं। दोनों को मिलवाया रीना की बहन ने ही, और उन्होंने ही बताया कि रीना रॉय भारतीय फ़िल्मों की टॉप हीरोइनों में से एक हैं।

मोहसिन ख़ान को इस बात से ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ा। दुनिया उन्हें उस वक़्त एक स्टाइलिश ओपनिंग बल्लेबाज़ के तौर पर जानती थी, और फ़िल्मों में उनकी दिलचस्पी लगभग शून्य थी।

“अमिताभ का सीन आ जाता तो कुछ पल रुक जाता था”

मोहसिन ख़ान ने बीबीसी से कहा — “मैंने शादी से पहले रीना रॉय की कोई फ़िल्म नहीं देखी थी। फ़िल्मों में मेरी दिलचस्पी सिर्फ़ इतनी थी कि घर से निकलते समय अगर अमिताभ बच्चन का कोई फ़िल्मी सीन स्क्रीन पर आ जाता, तो मैं कुछ पलों के लिए उसे देखने के लिए रुक जाता। इसके अलावा मैं फ़िल्में बिल्कुल नहीं देखा करता था।”

एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने इसी बात को और साफ़ किया था — “मैंने एक इंसान से उसकी ख़ूबसूरती और शोहरत नहीं, बल्कि उसकी आदत और उसके अच्छे व्यवहार को देखकर शादी की थी। मेरी इस बात पर शायद कोई यक़ीन नहीं करेगा, लेकिन यह सच है।”

1983 की वो शादी, जो अपनी तरह की पहली थी

दोस्ती प्यार में बदली और 1983 में दोनों शादी के बंधन में बँध गए। भारत में क्रिकेटर और अभिनेत्री की शादी नई बात नहीं थी — नवाब मंसूर अली ख़ान पटौदी और शर्मिला टैगोर का उदाहरण पहले से मौजूद था, और बाद में भी कई क्रिकेटरों ने अभिनेत्रियों से शादी की। लेकिन किसी पाकिस्तानी क्रिकेटर का किसी भारतीय अभिनेत्री को जीवनसाथी बनाना पहली बार हुआ था।

दोनों उस वक़्त अपने-अपने करियर की बुलंदी पर थे। शादी के बाद रीना रॉय ने फ़िल्मी दुनिया से किनारा कर लिया और पाकिस्तान में रहने लगीं।

साइरा अली से रीना रॉय तक

रीना रॉय का सफ़र नाम बदलने का सफ़र भी रहा। वो साइरा अली के नाम से शुरू हुईं, फिर रूपा रॉय बनीं और आख़िर में रीना रॉय — यह नाम उन्हें फ़िल्ममेकर बीआर इशारा ने दिया था।

शुरुआती नाकामियों के बाद ‘नागिन’, ‘आशा’ और ‘कालीचरण’ जैसी सफल फ़िल्मों ने उन्हें 70 के दशक की सबसे बड़ी हीरोइनों में शामिल कर दिया। यह वही दौर था जब हिंदी सिनेमा की कई अभिनेत्रियाँ शादी के बाद करियर छोड़ देती थीं — और रीना रॉय भी उसी रास्ते पर चली गईं। उसी दौर की फ़रीदा जलाल और अरुणा ईरानी जैसी अभिनेत्रियाँ 53 साल बाद फिर साथ आ चुकी हैं, जो बताता है कि इस पीढ़ी की कहानियाँ आज भी दर्शकों को खींचती हैं।

क्रिकेटर से हीरो: जेपी दत्ता और ‘बंटवारा’

सितंबर 1983 की बात है। बेंगलुरु में भारत-पाकिस्तान टेस्ट सिरीज़ का पहला मैच शुरू होने से पहले फ़िल्म निर्देशक जेपी दत्ता ने मोहसिन ख़ान से मिलने की इच्छा जताई। मुलाक़ात हुई तो उन्होंने सीधे कहा — “मेरे पास आपके लिए एक रोल है।”

मोहसिन ख़ान का जवाब था कि वो अभी क्रिकेट में व्यस्त हैं और जब तक हो सके अपने देश के लिए खेलना चाहते हैं, लेकिन क्रिकेट छोड़ने के बाद वो यह रोल ज़रूर करेंगे। कुछ समय बाद मुंबई में दोबारा मुलाक़ात हुई और दत्ता ने वादा याद दिलाया — फ़िल्म में धर्मेंद्र और विनोद खन्ना पहले से कास्ट थे, और वो मोहसिन को तीसरे हीरो के रूप में चाहते थे।

यहीं दिलचस्प मोड़ है: रीना रॉय और जेपी दत्ता के बीच दोस्ती थी, और मोहसिन ख़ान का फ़िल्मी करियर शुरू कराने और आगे बढ़ाने में सबसे आगे रीना रॉय ही थीं।

‘बंटवारा’ में पुलिस अफ़सर और एक फ़िल्मफ़ेयर नामांकन

‘बंटवारा’ की कास्ट में धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और शम्मी कपूर जैसे नाम थे। बिना किसी अभिनय अनुभव के इनके सामने खड़ा होना आसान नहीं था, लेकिन जेपी दत्ता ने सीन समझाने के लिए क्रिकेट की भाषा चुनी — उन्होंने कहा, मान लीजिए आपने शतक बनाया है फिर भी टीम हार गई है, उस हालत में ख़ुशी से ज़्यादा दर्द कैसे महसूस होगा।

नतीजा यह हुआ कि मोहसिन ख़ान को इस फ़िल्म के लिए फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता की श्रेणी में नामांकन मिला। उसी श्रेणी में नाना पाटेकर, विनोद खन्ना, अमरीश पुरी और पंकज कपूर भी नामांकित थे। अवॉर्ड ‘परिंदा’ के लिए नाना पाटेकर ले गए।

मोहसिन ख़ान — एक नज़र में

पहली मुलाक़ातलंदन, जब मोहसिन इंग्लैंड में लीग क्रिकेट खेल रहे थे
शादी1983
तलाक़90 के दशक की शुरुआत
बेटीपहले नाम जन्नत, बाद में सनम ख़ान
पहली हिंदी फ़िल्म‘बंटवारा’ (जेपी दत्ता) — पुलिस अफ़सर का किरदार
फ़िल्मफ़ेयर‘बंटवारा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नामांकन
बॉलीवुड फ़िल्मेंकुल 13; आख़िरी ‘महानता’ (1997)
पाकिस्तानी फ़िल्मेंपहली ‘राज़’, आख़िरी ‘साला बिगड़ा जाए’ (1999)
क्रिकेट का शिखर1982 में लॉर्ड्स पर दोहरा शतक

तलाक़, बेटी और कस्टडी

90 के दशक की शुरुआत में दोनों की राहें अलग हो गईं। तलाक़ की ख़बर मीडिया में उतनी ही बड़ी सुर्ख़ी बनी जितनी बड़ी उनकी शादी की ख़बर थी। रीना रॉय तलाक़ के बाद भारत लौट आईं, दोबारा फ़िल्मों में काम किया और बाद में टीवी शोज़ में मेहमान के तौर पर नज़र आती रहीं।

दोनों की एक बेटी है, जिसका नाम पहले जन्नत था और बाद में सनम ख़ान हो गया। बेटी की कस्टडी को लेकर भी मामला चला — शुरू में वो अपने पिता के पास थीं, बाद में माँ के पास चली गईं।

फ़िल्मी करियर जो चला तो, पर चला नहीं

मोहसिन ख़ान ने कुल 13 बॉलीवुड फ़िल्मों में काम किया। 1997 में आई ‘महानता’ उनकी आख़िरी हिंदी फ़िल्म रही। उन्हें व्यक्तिगत रूप से महेश भट्ट की ‘साथी’ सबसे पसंद है। भट्ट के बारे में उन्होंने बीबीसी से कहा — “भट्ट साहब बेहद ज्ञानी इंसान हैं। आप उनके साथ बैठकर ज़िंदगी के दर्शन को बहुत अच्छी तरह समझ सकते हैं।” इसी फ़िल्म का कुमार सानू का गाया गाना ‘ज़िंदगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए’ भी उन्हें बेहद प्रभावित कर गया था।

पाकिस्तान में उनकी पहली फ़िल्म ‘राज़’ थी, जिसमें उनके साथ बाबरा शरीफ़ थीं। ‘प्यासा सावन’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘जन्नत’, ‘इंसानियत’, ‘घूंघट’ और ‘दिल तेरा आशिक़’ जैसी फ़िल्में भी उन्होंने कीं। आख़िरी पाकिस्तानी फ़िल्म ‘साला बिगड़ा जाए’ 1999 में आई। सच यह है कि उनकी ज़्यादातर फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर नहीं चलीं।

वो करियर जो फ़िल्मों से कहीं बड़ा था

मोहसिन ख़ान का असली क़द क्रिकेट में बना। उनके पिता पाकिस्तान नेवी में अफ़सर थे और माँ टीचर व वाइस प्रिंसिपल। स्कूल-कॉलेज के दिनों में उन्होंने लगभग हर खेल खेला और पाकिस्तान के नेशनल जूनियर बैडमिंटन चैंपियन तक बने। क्रिकेट में उनका आना संयोग था — खिलाड़ियों की कमी के चलते एक कॉलेज मैच खेलना पड़ा और उसमें उन्होंने शतक जड़ दिया। उस मैच के अंपायर उमर ख़ान ने उन्हें क्रिकेट गंभीरता से लेने की सलाह दी।

1982 उनके करियर का सबसे बड़ा साल रहा। लॉर्ड्स पर खेली गई दोहरी शतकीय पारी ने उस मैदान पर पाकिस्तान की पहली जीत की नींव रखी। उसी साल वो एक कैलेंडर वर्ष में एक हज़ार टेस्ट रन पूरे करने वाले पहले पाकिस्तानी बल्लेबाज़ बने, और भारत, ऑस्ट्रेलिया व श्रीलंका के ख़िलाफ़ शतक भी लगाए — तीनों लाहौर में। 1983-84 की ऑस्ट्रेलिया सिरीज़ में उन्होंने एडीलेड में 149 और मेलबर्न में 152 रन बनाए।

अभी क्या साफ़ नहीं है

यह पूरा ब्योरा मोहसिन ख़ान की तरफ़ से है। रीना रॉय ने इस इंटरव्यू पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और तलाक़ की वजह पर दोनों में से किसी ने खुलकर कुछ नहीं कहा। बॉलीवुड की पुरानी पीढ़ी से जुड़ी ऐसी और कहानियों के लिए बॉलीवुड सेक्शन देखते रहें — जैसे हाल ही में 400 फ़िल्मों वाली अभिनेत्री सौकार जानकी के निधन की ख़बर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मोहसिन ख़ान ने रीना रॉय के बारे में क्या कहा?

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा कि उन्होंने शादी से पहले रीना रॉय की कोई फ़िल्म नहीं देखी थी और शादी उनकी ख़ूबसूरती या शोहरत देखकर नहीं, बल्कि उनके स्वभाव और व्यवहार को देखकर की थी।

रीना रॉय और मोहसिन ख़ान की शादी कब हुई थी?

दोनों की शादी 1983 में हुई थी। 90 के दशक की शुरुआत में उनका तलाक़ हो गया।

रीना रॉय का असली नाम क्या है?

उनका नाम साइरा अली था। बाद में वो रूपा रॉय के नाम से जानी गईं और फिर फ़िल्ममेकर बीआर इशारा ने उन्हें रीना रॉय नाम दिया।

दोनों की बेटी का क्या नाम है?

उनकी बेटी का नाम पहले जन्नत था, जो बाद में सनम ख़ान हो गया। कस्टडी का मामला भी चला — पहले वो पिता के पास थीं, बाद में माँ के पास चली गईं।

मोहसिन ख़ान ने कौन-सी हिंदी फ़िल्मों में काम किया?

उनकी पहली हिंदी फ़िल्म जेपी दत्ता की ‘बंटवारा’ थी, जिसमें उन्होंने पुलिस अफ़सर का किरदार निभाया और फ़िल्मफ़ेयर नामांकन पाया। कुल 13 बॉलीवुड फ़िल्मों में काम किया, आख़िरी ‘महानता’ (1997) थी।

क्रिकेट में मोहसिन ख़ान की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

1982 में लॉर्ड्स पर दोहरा शतक, जिसने उस मैदान पर पाकिस्तान की पहली जीत की नींव रखी। उसी साल वो एक कैलेंडर वर्ष में एक हज़ार टेस्ट रन बनाने वाले पहले पाकिस्तानी बल्लेबाज़ भी बने।

स्रोत: बीबीसी न्यूज़ हिन्दी

Riya Mehta covers Hindi entertainment news at Sabhi Saman, with a focus on Bollywood, Bhojpuri cinema, and OTT releases. She tracks trending celebrity stories and verifies them against credible sources before writing.

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