सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सिंगर शान को कुछ लोग “अब्यूज़र अंकल” कहकर बुला रहे हैं। इस वीडियो को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इस पर हँसी-मजाक कर रहे हैं, तो कुछ लोग शान के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। लेकिन असल में हुआ क्या था? क्या वाकई शान ने कोई ग़लती की थी? चलिए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
क्या है पूरा मामला?
शान ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन किया था जिसमें वो अपने फैन्स के साथ सीधे बातचीत कर रहे थे। इस दौरान कुछ यूज़र्स ने कमेंट्स के ज़रिए उन्हें ट्रोल करने की कोशिश की और जानबूझकर ऐसे शब्द लिखे जिनका अर्थ अश्लील या गाली जैसा था। शान ने उन शब्दों को बिना समझे पढ़ दिया, क्योंकि वे उन कमेंट्स को फैन-मैसेज समझकर पढ़ रहे थे। यह वीडियो बाद में वायरल हो गया और लोग शान को “अब्यूज़र अंकल” कहने लगे।
शान ने क्या कहा?
इस घटना के बाद शान ने एक सफाई वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने शांति से बताया कि उन्हें इन शब्दों का अर्थ नहीं पता था। वो सिर्फ फैंस के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि लोग जानबूझकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो गुस्से में नहीं हैं, लेकिन उन्हें दुख है कि लोग आजकल सोशल मीडिया पर गंदगी फैलाने को मज़ाक समझते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वो ट्रोल्स से प्रभावित नहीं होते, लेकिन ये ज़रूर सोचने वाली बात है कि समाज किस दिशा में जा रहा है।

सोशल मीडिया पर रिएक्शन
घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और कमेंट्स की बाढ़ आ गई। कुछ यूज़र्स ने इसे मज़ेदार बताया, तो कई लोगों ने इसे जनरेशन गैप का नतीजा कहा। कई पुराने फैंस ने शान का समर्थन करते हुए लिखा कि उनके जैसे सभ्य और शांत कलाकार के साथ ऐसा व्यवहार करना निंदनीय है। वहीं कुछ युवा यूज़र्स ने इसे एक “प्रैंक” बताकर टालने की कोशिश की। लेकिन बहस इस बात पर आ गई कि क्या हम अपनी डिजिटल आज़ादी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं?
बात एक मज़ाक की नहीं है
इस घटना को केवल एक मज़ाक या ट्रेंड कहकर टाला नहीं जा सकता। यह उदाहरण है उस बदलती सोच का, जिसमें किसी को नीचा दिखाना, ट्रोल करना और वायरल करना ही लोगों को मज़ा देने लगा है। शान जैसे कलाकार, जो हमेशा से अपनी गरिमामयी छवि और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, उनके साथ ऐसा होना यह दर्शाता है कि इंटरनेट पर अब कोई भी सुरक्षित नहीं है। यह हमारे समाज के डिजिटल चरित्र पर एक सवाल खड़ा करता है।
यह सिर्फ शान की नहीं, हमारी भी कहानी है
शान ने जिस तरीके से इस पूरे मुद्दे को संभाला, वह हम सबके लिए एक उदाहरण है। उन्होंने न तो गुस्सा किया, न ही जवाब में अपशब्दों का सहारा लिया — बल्कि शांति और समझदारी से अपनी बात रखी। इससे हमें यह सीख मिलती है कि ट्रोलिंग का जवाब ट्रोलिंग नहीं है, बल्कि गरिमा और विवेक है। लेकिन इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम एक ऐसा डिजिटल समाज बनाना चाहते हैं जहाँ कोई किसी के सम्मान के साथ खेल सके, और उसे मज़ाक कहकर टाल दिया जाए? हमें तय करना होगा कि हम किस तरह का इंटरनेट चाहते हैं — भड़काऊ या सहनशील।













